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राजनांदगांव

राज्यपाल को बहुसंख्यक समाज का अपमान करने का कोई अधिकार नहीं- विप्लव साहू

सत्यमेव न्यूज़/खैरागढ़. छत्तीसगढ़ आरक्षण विधेयक को साइन न करते हुये, राज्यपाल द्वारा सवाल खड़ा करना चिंताजनक है और छत्तीसगढ़ के भाईचारा को खराब करने जैसा है. सामाजिक कार्यकर्ता व राजनांदगांव जिला पंचायत के सभापति विप्लव साहू ने राज्यपाल द्वारा सिर्फ अनुसूचित जनजाति के लिये विधेयक बुलाने और बाकी वर्ग को नजर अंदाज किये जाने पर गहरा विरोध दर्ज किया है. उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार द्वारा क्वांटिफायल डाटा के माध्यम से गिनती करवाकर संविधानिक सामाजिक सर्वसम्मति से विधेयक पारित किया है तो इसे रोकना और निरर्थक सवाल खड़ा करना, संविधान के उल्लंघन जैसा है. यह राज् य सरकार और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी होगी कि इसका बचाव वह कैसे करते हैं. इसमें साइन करने में देरी के चलते उनकी ही छवि पर बुरा असर पड़ सकता है.

जब केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने ही अपने आरक्षण के 50 प्रतिशत की सीलिंग को तोडक़र ईडब्ल्यूएस आरक्षण लाकर सबको मौका दे दिया है तो जिस किसी को आरक्षण पर आपत्ति हो वह दम दिखाते हुये सीधे सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति लगाये. उन्होंने कहा कि राज् य के ओबीसी सांसदों और विधायकों को शर्म आनी चाहिये कि वे अपने समाज-वर्ग के अधिकार हित में मुंह तक नहीं खोल पा रहे हैं. श्री साहू ने कहा कि उन्हें चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिये जबकि उन्हें, राज् य में ओबीसी की जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के आधार पर वास्तविक संख्या 52 प्रतिशत आरक्षण की मांग करनी चाहिये. ध्यान देने योग्य बात है कि पड़ोसी राज्य झारखंड में आरक्षण विधेयक वहां के राज्य सरकार और राज्यपाल रमेश बैस द्वारा बिना कोई हील-हवाला किये लागू कर दिया गया.

Satyamev News

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