मिडल ईस्ट तनाव का असर: भारत में महंगा हुआ गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे

सत्यमेव न्यूज़ (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की रसोई तक पहुंचने वाला है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके चलते भारत में एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। तेल एवं गैस कंपनियों ने हाल ही में एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में संशोधन किया है। नई दरों के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडर पर लगभग 60 रुपये की वृद्धि की गई है जबकि कमर्शियल सिलेंडर करीब 115 रुपये तक महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद छोटे व्यवसायों होटलों और ढाबों की लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
युद्ध से प्रभावित हुई ऊर्जा आपूर्ति
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर काफी हद तक निर्भर है। मौजूदा तनाव के कारण समुद्री मार्गों से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। कई जहाजों की आवाजाही में देरी हो रही है जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
पेट्रोल और डीजल पर भी पड़ सकता है असर
कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाओं की लागत बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस बीच भारत के लिए राहत की एक खबर यह भी है कि United States ने Russia से तेल खरीदने को लेकर कुछ छूट दी है। इससे कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर तत्काल संकट की स्थिति कुछ हद तक टल गई है हालांकि गैस आपूर्ति को लेकर चुनौती बनी हुई है।
सरकार तलाश रही वैकल्पिक रास्ते
मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक विकल्पों पर काम कर रही है। इसमें अन्य तेल उत्पादक देशों से आयात बढ़ाने की संभावना रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग की तैयारी और आयात स्रोतों में विविधता लाने जैसे कदम शामिल हैं।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर संकेत
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का संकेत है। साथ ही सौर पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर जोर देने की जरूरत भी बताई जा रही है। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं हुआ तो सरकार को महंगाई के असर को कम करने के लिए सब्सिडी बढ़ाने या करों में कटौती जैसे उपाय भी अपनाने पड़ सकते हैं ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।