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मानसिक स्वास्थ्य को मिली प्राथमिकता: महाविद्यालय में जागरूकता अभियान का शुभारंभ

सत्यमेव न्यूज बाजार अतरिया। तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीकी युग की भागदौड़ के बीच मानसिक स्वास्थ्य आज एक गंभीर सामाजिक और शैक्षणिक चुनौती बनकर उभर रहा है। जिस मानसिक संतुलन पर व्यक्ति की सोच, कार्यक्षमता और भविष्य निर्भर करता है, वही लंबे समय तक उपेक्षित रहा। ऐसे समय में नवीन शासकीय महाविद्यालय, बाजार अतरिया द्वारा मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण के लिए की गई पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि शिक्षा जगत के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। महाविद्यालय में आयोजित ‘मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण’ विषयक प्रथम बैठक ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि अब शिक्षण संस्थान केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक सशक्तिकरण को भी अपनी प्राथमिकता में शामिल करेंगे। बैठक में स्वीकार किया गया कि तनाव, चिंता, अवसाद और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याएं युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही हैं, जिनका समाधान केवल अकादमिक उपलब्धियों से संभव नहीं है। बैठक के दौरान मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के विस्तार, परामर्श सेवाओं की उपलब्धता, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के पारस्परिक संबंध तथा विशेष समूहों के लिए लक्षित प्रयासों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। यह निर्णय लिया गया कि महाविद्यालय में तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास विकास और भावनात्मक संतुलन जैसे विषयों पर विशेष मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे। साथ ही नियमित संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, संवाद कार्यक्रमों और परामर्श सत्रों के माध्यम से इस पहल को संस्थागत स्वरूप दिया जाएगा। इस अभियान की विशेषता यह है कि इसे केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखकर निरंतर प्रक्रिया के रूप में संचालित करने का संकल्प लिया गया है। संयोजक आशीष कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य को स्वस्थ समाज की आधारशिला बताते हुए कहा कि जागरूकता ही समस्याओं के समाधान की पहली सीढ़ी है। अध्यक्ष अंजली क्षत्री ने विद्यार्थियों से मानसिक संतुलन बनाए रखने और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर सिद्धार्थ देशमुख एवं झामन वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। यह पहल शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर जीवन कौशल से जोड़ने की व्यापक सोच को दर्शाती है। यदि इस प्रकार के प्रयास अन्य शिक्षण संस्थानों में भी अपनाए जाएं, तो समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा और एक स्वस्थ, संवेदनशील तथा सशक्त पीढ़ी का निर्माण संभव हो सकेगा। कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार के सदस्य एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में यह संकल्प दोहराया गया कि मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण को लेकर निरंतर प्रयास किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को सकारात्मक, सुरक्षित और प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण प्रदान किया जा सके।

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