महाविद्यालयों में प्रवेश की आज अंतिम तिथि, शिक्षकों की कमी व संसाधनों के अभाव के बीच शुरू होगा अध्ययन-अध्यापन

जिले के 8 शासकीय महाविद्यालयों में प्रतिवर्ष 8 हजार से अधिक छात्र करते हैं अध्ययन
नई शिक्षा नीति हुई लागू, इस सत्र से सेमेस्टर पद्धति से पढ़ेंगे महाविद्यालयीन छात्र
नियमित प्राध्यापकों के आधे से अधिक पद रिक्त, अतिथि प्राध्यापकों के भरोसे पढ़ाई
सत्यमेव न्यूज़ खैरागढ. जिले के महाविद्यालयों में 31 जुलाई तक प्रवेश की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। यूं तो हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग से संबद्ध जिले के खैरागढ़ महाविद्यालय, कन्या महाविद्यालय खैरागढ़ सहित गंडई, छुईखदान, साल्हेवारा, जालबांधा, बाजार अतरिया व ठेलकाडीह महाविद्यालय में 1 जुलाई से अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है लेकिन प्रवेश प्रक्रिया के साथ ही अतिथि प्राध्यापकों की भर्ती सहित अन्य व्यवस्थाओं के कारण अभी महाविद्यालयों में पढ़ाई गति नहीं पकड़ पायी है। जिले के सभी महाविद्यालयों में अलग-अलग विषयों में प्रवेश के लिये ऑनलाईन आवेदन की प्रक्रिया मंगलवार 31 जुलाई को समाप्त हो जाने तथा सप्ताह के अंत तक अतिथि प्राध्यापकों की भी भर्ती पूरी हो जाने के बाद अध्यापन व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर आ पायेगी।
नई शिक्षा नीति लागू, सेमेस्टर पद्धति से होगी पढ़ाई
जिले के सभी महाविद्यालयों में इस सत्र से नई शिक्षा नीति के लागू हो जाने के बाद सेमेस्टर पद्धति से अध्यापन व्यवस्था कराई जा रही है। सेमेस्टर पद्धति से साल में दो बार परीक्षा आयोजित की जायेगी। इस सत्र में यह प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिये लागू होगा वहीं अगले सत्र से यह द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिये लागू किया जायेगा। नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को किसी एक विषय में दूसरा एक विषय लेने का विकल्प मिला हैं, मसलन बीए का विद्यार्थी वैकल्पिक रूप से एक विषय गणित का भी ले सकता है वहीं बीएससी का या बीकॉम का छात्र भी दूसरे किसी विषय को विकल्प के रूप में लेकर अध्ययन कर सकता हैं। बताया गया कि अगले दो साल बाद सभी महाविद्यालयों में प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष की परीक्षा सेमेस्टर पद्धति से होगी। इसके लिये विश्वविद्यालय द्वारा अकादमिक कैलेंडर भी जारी कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत स्नातक प्रथम वर्ष में प्रथम सेमेस्टर प्रणाली के तहत लिखित परीक्षा 28 नवंबर से तथा द्वितीय सेमेस्टर की लिखित परीक्षा 1 मई 2025 से आयोजित किये जाने का निर्देश प्राप्त हुआ है।
जिले में नियमित प्राध्यापकों की कमी बरकरार, अतिथि प्राध्यापकों के भरोसे उच्च शिक्षा
जिले के ठेलकाडीह, जालबांधा, बाजार अतरिया, छुईखदान, गंडई व साल्हेवारा में एक-एक महाविद्यालय संचालित है वहीं जिला मुख्यालय खैरागढ़ में जिले के सबसे बड़े व सबसे पुराने महाविद्यालय के रूप में प्रतिष्ठित रानी रश्मि देवी सिंह शासकीय महाविद्यालय खैरागढ़ एवं कन्या महाविद्यालय खैरागढ़ संचालित है। इनमें से खैरागढ़ रश्मि देवी महाविद्यालय के साथ छुईखदान व गंडई के महाविद्यालय पूर्व में मध्यप्रदेश शासन काल के समय से संचालित है वहीं ठेलकाडीह व साल्हेवारा में संचालित महाविद्यालय की स्थापना पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में हुई थी तथा बीते साल कांग्रेस शासनकाल में बाजार अतरिया, जालबांधा व कन्या महाविद्यालय खैरागढ़ की स्थापना की गई थी। इनमें से आधे से अधिक महाविद्यालयों के पास खुद का भवन भी नहीं है वहीं सबसे बड़ी समस्या नियमित प्राध्यापकों की है जिनके आधे से अधिक पद इन महाविद्यालयों में रिक्त पड़े हुये हैं। ऐसे में प्रति वर्ष उच्च शिक्षा का दारोमदार अतिथि प्राध्यापकों एवं जनभागीदारी से नियुक्त शिक्षकों के भरोसे रहता है। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद साय सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री का पद संभालने वाले बृजमोहन अग्रवाल ने मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों की तर्ज पर अतिथि प्राध्यापकों के लिये यूजीसी के गाईड लाईन के अनुरूप नई नीति बनाई है और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (शोध कार्य), नेट, सेट व एम फिल की उपाधि प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों को इस नीति के तहत जॉब सेक्योरिटी वेतनमान बढ़ाये गये हैं। बावजूद इसके महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं को नियमित प्राध्यापकों का इंतजार है लेकिन इसके लिये शासन स्तर पर प्राध्यापकों की भर्ती का इंतजार करना पड़ेगा।
प्रभारी प्राचार्य के भरोसे जिले के सभी 8 महाविद्यालय
जिला मुख्यालय खैरागढ़ के दोनों महाविद्यालय सहित गंडई, छुईखदान, साल्हेवारा, जालबांधा, बाजार अतरिया व ठेलकाडीह महाविद्यालय में नियमित प्राचार्य के पद भी रिक्त हैं। इन सभी महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यपकों को बतौर प्रभारी प्राचार्य बनाकर प्रशासनिक व्यवस्था का जैसे-तैसे संचालन किया जा रहा हैं। इनमें से बीते सत्र में प्रारंभ हुये जालबांधा, बाजार अतरिया और कन्या महाविद्यालय खैरागढ़ में दूसरे महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य ही प्राचार्य का प्रभार संभाल रहे हैं और इन नवीन महाविद्यालयों में अब तक एक भी नियमित प्राध्यापकों की नियुक्ति सीधे शासन स्तर पर नहीं हो पायी है। ऐसे में समझा जा सकता हैं कि सरकार की उच्च शिक्षा नीति का बुनियादी ढ़ांचा कितना कमजोर हैं और इसका सीधा खामियाजा विद्यार्थियों को उठाना पड़ता हैं। महाविद्यालयों में प्रभारी प्राचार्य के पद पर नियुक्त स.प्राध्यपक प्रशासनिक व्यवस्था में उलझ जाते हैं और ऐसे में विद्यार्थियों को उनके द्वारा चाहकर भी नियमित अध्यापन व्यवस्था नहीं दी जाती।
महाविद्यालयों में सीटे खाली रही तो बढ़ सकती हैं प्रवेश की तिथि
31 जुलाई को महाविद्यालयों में प्रवेश की अंतिम तिथि समाप्त हो जाने के बाद क्या महाविद्यालयों में प्रवेश की तिथि पूर्व के वर्षों की तरह बढ़ाई जायेगी इस पर अभी संदेह बरकारार हैं। उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो महाविद्यालयों में अगर सीटे खाली रही तो प्रवेश की तिथि को बढ़ाया जा सकता हैं। इस विषय के साथ अन्य महाविद्यालयीन विषयों को लेकर जुलाई माह की समाप्ति के एक दिन बाद 1 अगस्त को उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त श्रीमती शारदा वर्मा महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक लेंगी। महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की सीटे रिक्त रही तो पूर्व के वर्षों की तर्ज पर आगामी 14 अगस्त तक दुर्ग विवि के कुलपति की विशेष अनुमति से विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग खुल जायेगा।
31 जुलाई को प्रवेश की अंतिम तिथि निर्धारित की गई हैं। प्रवेश की तिथि बढ़ाने संबंधी अभी कोई नया आदेश नहीं हैं। अध्यापन व्यवस्था 1 जुलाई से प्रारंभ कर दी गई हैं वहीं शासन के निर्देशानुसार रिक्त पदों पर अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती की प्रक्रिया की जा रही है।
डॉ.जितेन्द्र कुमार सांखरे, प्रभारी प्राचार्य खैरागढ़ महाविद्यालय