मध्यान्ह भोजन में लापरवाही के चलते निलंबित बीईओ 18 दिन बाद बहाल

खैरागढ़. बच्चों के मध्यान्ह भोजन में लापरवाही बरतने वाले खैरागढ़ बीईओ महेश भुआर्य को संभागायुक्त महादेव कांवरे ने निलंबित कर दिया था लेकिन महज 18 दिन बाद उन्हें आयुक्त दुर्ग संभाग ने दोबारा उसी जगह पर बहाल कर दिया है जबकि इसी मामले में रेंगाकठेरा प्राथमिक और मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक अभी भी निलंबित है. बहाली का कारण बताते हुए आयुक्त कार्यालय के पत्र अनुसार बीईओ महेश भूआर्य ने आरोपो को अस्वीकार किया है जो समाधानकारक नहीं होने के कारण छग सिविल सेवा अधिनियम 1966 के नियम 14 के प्रावधान अनुसार विभागीय जांच किया जाएगा. जॉच संभागीय उपायुक्त करेंगे वहीं प्रस्तुतकर्ता अधिकारी ओएसडी डीईओ को बनाया गया है. गौरतलब है कि 10 नवंबर को संभागायुक्त ने ब्लॉक के रेंगाकठेरा स्कूल में दबिश दी थी जहां उन्होंने पाया कि दोनों स्कूलों में ढाई महीने से बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिल रहा है. हालांकि इसके पीछे स्टाफ ने सितंबर महीने की शुरुआती हफ्ते से रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का हवाला दिया था लेकिन संभागायुक्त महादेव कावरे ने विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी समय पर जानकारी नहीं देने के कारण दोनों शालाओं के प्रधानपाठक को निलंबित कर दिया था और दो दिन बाद बीईओ महेश भुआर्य को भी सस्पेंड कर डीईओ राजनांदगांव सलंग्न कर दिया.

शौचालय निर्माण को भी बनाया कारण
मध्यान्ह भोजन के अलावा प्राथमिक शाला में शौचालय निर्माण नहीं होने को भी सस्पेंशन का आधार बनाया है. 10 नवंबर को निरीक्षण के दौरान स्कूल पहुॅचे संभागायुक्त ने पाया कि दोनों स्कूलों में 6 सितंबर से बच्चों को मध्यांह भोजन नहीं मिल रहा है, 8 नवंबर तक यही स्थिति थी और खाना मिलना दो महीने बाद 9 नवंबर से चालू हुआ जिसे लेकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए संभागीय संयुक्त संचालक को कारवाई के लिए निर्देशित किया जिसके बाद 15 नवंबर को पू.मा.शा. के प्रधानपाठक माखन लाल साहू और एक दिन बाद 16 नवंबर को कलेक्टर डॉ.जगदीश कुमार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम में लापरवाही और उच्चाधिकारियों को मध्यान्ह भोजन बंद होने की जानकारी नहीं देने के कारण प्राशा की प्रधानपाठिका ललिता साहू को भी निलंबित कर बीईओ आफिस में संलग्र कर दिया है.
एक की बहाली दो बचे, मामला एक ही
महज 18 दिनों में निलंबन बाद बहाली को लेकर विभाग एक बार फिर कटघरे में दिख रहा है. जानकारों के मुताबिक निलंबन बाद संबंधित अधिकारी कर्मचारी को मुख्य कार्यालय में संलग्र किया जाता है जहां आरोपों से दोषमुक्ति के बाद ही मूल जगह पर अथवा संबंधित कार्यालय में बहाल किया जाता है लेकिन यहां आयुक्त कार्यालय द्वारा बीईओ के आवेदन में आरोपों को अस्वीकार किए जाने के आधार पर ही मूल जगह में बहाली का आदेश जारी कर दिया जबकि अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट तौर पर विभागीय जॉच के लिए जॉचकर्ता और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया है. इस स्थिति में एक ही मामले में संस्पेड तीन में से एक की बहाली के बाद शेष दो के भी बहाल होने की संभावना बढ़ गई है जबकि बहाली को लेकर आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी पत्र को लेकर सवाल उठ रहा है.