मतदाता सूची पुनरीक्षण में विभा सिंह के लापरवाही के आरोप को जिला प्रशासन ने बताया निराधार


एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी- प्राधिकृत निर्वाचन अधिकारी
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। मतदाता सूची पुनरीक्षण में विभा सिंह के लापरवाही के आरोप को जिला प्रशासन ने निराधार बताते हुये एसआईआर की गाइड लाईन का हवाला दिया है। मामले में जिले में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के प्राधिकृत निर्वाचन अधिकारी व खैरागढ़ एसडीएम टंकेश्वर प्रसाद साहू ने एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बताया है। जिला प्रशासन कि ओर से कहा गया है कि निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही की बात तथ्यविहीन है। प्रशासन ने इन आरोपों को पूर्णतः निराधार, तथ्यहीन एवं भ्रम फैलाने वाला करार दिया है तथा प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत सर्वप्रथम विशेष गहन पुनरीक्षण-2003 एवं संक्षिप्त पुनरीक्षण-2025 की मतदाता सूचियों में दर्ज मतदाताओं का परस्पर तकनीकी मिलान किया गया। निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 23 दिसंबर 2025 को निर्वाचक नामावलियों का प्रारंभिक प्रकाशन किया गया। इस दौरान वर्ष 2003 एवं 2025 की मतदाता सूचियों में जिन मतदाताओं के नाम जिस स्वरूप में दर्ज थे उसी के अनुरूप उनका मिलान कर एकीकृत प्रारंभिक मतदाता सूची तैयार की गई। प्रकाशित प्रारंभिक मतदाता सूची के संबंध में यदि किसी मतदाता अथवा अन्य व्यक्ति को किसी प्रकार की त्रुटि, दावा या आपत्ति प्रस्तुत करनी हो तो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित अवधि 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक विहित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्यों सहित आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। प्राप्त सभी दावों एवं आपत्तियों पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 12 से 21 के अंतर्गत नियमानुसार विधिवत जांच एवं कार्यवाही की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिला खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई में निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी सावधानी, निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। पुनरीक्षण प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।