
ठेका कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पहले भी हो चुकी हैं दुर्घटनाएं, जिम्मेदारी तय करने की मांग
खैरागढ़। विद्युत विभाग ठेलकाडीह अंतर्गत कार्यरत एक ठेका कर्मचारी 15 मार्च की सुबह एक गंभीर हादसे का शिकार हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार लाइन सुधार कार्य के दौरान कर्मचारी बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के बिजली के खंभे पर चढ़ा था। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर पड़ा जिससे उसके कमर और हाथ में गंभीर चोटें आयी। घायल कर्मचारी को तत्काल उपचार के लिए राजनांदगांव के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार संबंधित कर्मचारी पहले भी दुर्घटनाओं का सामना कर चुका है जिससे विभागीय कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ठेलकाडीह क्षेत्र में विद्युत विभाग के अंतर्गत दो ठेकेदारों के माध्यम से लगभग आधा दर्जन कर्मचारी कार्यरत हैं जिनसे फाल्ट सुधार जैसे जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाते हैं। नियमों के विपरीत कराया जा रहा जोखिमपूर्ण कार्यजानकारों का कहना है कि विद्युत विभाग में नियमित लाइनमैन की नियुक्ति होने के बावजूद ठेका कर्मियों से ऐसे खतरनाक कार्य कराना नियमों के विपरीत है वहीं कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें हेलमेट, इंसुलेटेड दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते जिससे उनकी जान हर समय जोखिम में बनी रहती है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
घटना के बाद एक बार फिर यह मुद्दा सामने आया है कि बिना सुरक्षा उपायों के कार्य कराना श्रमिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। कर्मचारियों का कहना है कि वे कई बार सुरक्षा उपकरणों की मांग कर चुके हैं लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है।
प्रशासन से की गई है कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों ने इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी ठेका एवं नियमित कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई है। ज्ञात हो कि इस घटना से न केवल विभागीय लापरवाही उजागर हुई है बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर भी ठोस रणनीति और पहल करने की मांग बलवती हुई है। बहरहाल देखना होगा कि विभाग और जिला प्रशासन इस दिशा में किस तरह की पहल कर अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन करता है।



