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संगीत बना सुधार और मानसिक शांति का माध्यम: उपजेल में गूंजी सितार की स्वरलहरियां

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.लवली शर्मा ने खैरागढ़ उपजेल में आयोजित विशेष संगीत-संवाद कार्यक्रम के माध्यम से कैदियों को संगीत की उपचारात्मक एवं सकारात्मक शक्ति से परिचित कराया। कार्यक्रम ने कारागार के वातावरण को संगीत की मधुर स्वरलहरियों से सराबोर कर दिया, जिससे परिसर में शांति, सकारात्मकता और आत्मिक सुकून का माहौल निर्मित हुआ।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने अपने उत्कृष्ट सितार वादन की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित कैदियों और अधिकारियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सितार की मधुर धुनों के बीच कैदी पूरी तन्मयता से संगीत का रसास्वादन करते रहे। स्वरों की गूंज ने न केवल वातावरण को सौम्य बनाया बल्कि उपस्थित जनों को मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन का भी अनुभव कराया। प्रस्तुति में तबला वादक अवध सिंह ने अपनी प्रभावशाली संगत से कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बना दिया। सितार और तबले के अद्भुत समन्वय ने श्रोताओं को लंबे समय तक बांधे रखा तथा संगीत की गहराई और सौंदर्य का अनुभव कराया।
इस अवसर पर प्रो. शर्मा ने संगीत चिकित्सा (म्यूजिक थेरेपी) विषय पर अपने शोध अनुभव साझा करते हुए कहा कि संगीत केवल मनोरंजन या कला की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन और मस्तिष्क को संतुलित करने का प्रभावी साधन भी है। उन्होंने बताया कि वर्षों पूर्व कारागारों में बंद व्यक्तियों पर संगीत के प्रभाव को लेकर किए गए अध्ययनों में यह तथ्य सामने आया कि नियमित रूप से संगीत सुनने और उससे जुड़ने से तनाव में कमी आती है, भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है तथा सकारात्मक सोच का विकास होता है। उन्होंने कहा कि कारागार जैसे वातावरण में संगीत व्यक्तियों के भीतर आत्ममंथन, संवेदनशीलता और आत्मसुधार की भावना को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संगीत मनुष्य के अंतर्मन तक पहुंचकर उसे नई ऊर्जा, सकारात्मक दृष्टिकोण और जीवन के प्रति आशा प्रदान करने की क्षमता रखता है। उपजेल में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, भावनात्मक पुनर्वास और सुधारात्मक प्रक्रिया को सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में उभरकर सामने आया। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि संगीत समाज के प्रत्येक वर्ग तक सकारात्मक परिवर्तन और मानवीय संवेदनाओं को पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। गौरतलब है कि खैरागढ़ उपजेल में आयोजित विशेष संगीत-संवाद कार्यक्रम में राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.लवली शर्मा ने सितार वादन एवं संगीत चिकित्सा पर संवाद के माध्यम से कैदियों को मानसिक शांति, आत्मसुधार और सकारात्मक जीवन दृष्टि का संदेश दिया। कार्यक्रम ने कारागार में सुधारात्मक पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की नई पहल को मजबूत किया।

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