बरसो से गायब कुछ और कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज, विभाग जुटा तैयारी में
सत्यमेव न्यूज़ खैरागढ़. अपने कार्य क्षेत्र में वर्षों से नदारद शिक्षा विभाग के चार कर्मचारियों की बर्खास्तगी के बाद अब प्रशासन ऐसे कर्मचारियों की तलाश कर रहा है जो लंबे समय से कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरतने नए-नए उपायों को अमल में ला रहे हैं। जानकारी अनुसार विभाग जल्द ही बाजार अतरिया में पदस्थ पीटीआई अनिता सिंह जो चार साल से ज्यादा समय से बिना कोई ठोस कारण बताए, गायब है उन्हें और उदान शाला में पदस्थ उर्मिला भगत जो छ: साल से ज्यादा समय से कार्य स्थल पर अनुपस्थित है उनके खिलाफ कार्यवाही कर सकती है जबकि निलंबन बाद बीते दो साल से गायब शिक्षक धनजंय सिंह के घर का पता सही नहीं मिलने के कारण विभाग नोटिस की तामिली नहीं कर पा रहा है। अनिता सिंह के मामले में कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी को नियमत: इस पर कार्यवाही करने कहा जिसके बाद संयुक्त व्यायाम शिक्षिका के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही किये जाने का निवेदन किया गया है। इसके बावजूद लंबा समय बीतने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
निलंबितों के लिए निलंबन वरदान कार्यस्थल पर गायब शिक्षकों के अलावा विभाग के लिए निलंबित कर्मचारी भी सिरदर्द बने हुये है। कार्य में लारवाही या अनुशासनहीनता के चलते दर्जनों शिक्षक के लिए निलंबन वरदान बना हुआ है जो विभागीय नियमों की जानकारी होने के कारण शिक्षकीय कार्य के अलावा ज्यादातर समय दीगर काम में लगा रहे है। निलंबन अवधि में उन्हें खैरागढ़ और छुईखदान बीईओ में अटैच किया जाता है लेकिन देखा जा रहा है कि ज्यादातर संबंधित मुख्यालय में उपस्थिति दर्शाकर गायब हो जाते है। इस अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होती है लेकिन निलंबन आदेश और भत्ते की अलग-अलग विभागीय व्याख्या के चलते वो महीने पंद्रह में एक दिन वहाँ पहुँचते हैं। पता चला है कि विभाग में आधा दर्जन के आसपास कर्मचारी अलग-अलग कारणों से निलंबित है और उनका निलंबन अवधि में मुख्यालय भी आदेश में तय किया गया है लेकिन निलंबन आदेश लेेकर संबंधित मुख्यालय में उपस्थिति दर्शाने के बाद से ज्यादातर दोबारा वहाँ झांकने नहीं गए है और हर महीने जीवन निर्वाह भत्ता पा रहे हैं।
बिना उपस्थिति पत्रक जमा किए निकल रहा भत्ता
निलंबन आदेश में बकायदा संबंधित कर्मचारी का मुख्यालय तय कर उन्हें वहाँ अटैच किया जाता है जहाँ उपस्थिति पत्रक बनता है और संबंधित डीडीओ पॉवर वाली मूल संस्था से उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलता है लेकिन यहाँ इस नियम का पालन नहीं हो रहा है। पता चला है कि अभी आधा दर्जन से ज्यादा शिक्षक काम में लापरवाही बरतने या अन्य कारणों से निलंबित है लेकिन मुख्यालय में उपस्थिति के बाद से उनका कही अता-पता नहीं है। मामले में छुईखदान बीईओ रमेंद्र डड़सेना ने कहा कि उनके कार्यालय में हर सोमवार निलंबन बाद अटैच कर्मचारी उपस्थिति देने आते है। खैरागढ़ बीईओ नीलम सिंह राजपूत ने कहा कि उनके यहाँ निलंबन बाद कौन अटैच है उसे उन्होंने अभी तक देखा नहीं है।