बजट पर विधायक प्रतिनिधि ने दी तीखी प्रतिक्रिया कहा- केवल आंकड़ों का विस्तार, जमीनी जरूरतें दरकिनार

मनराखन देवांगन बोले- गांव किसान और युवा अब भी प्राथमिकता से बाहर
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। विधानसभा में प्रस्तुत राज्य बजट को लेकर विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन ने भाजपा सरकार पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि बजट का आकार बढ़ जाना विकास का पर्याय नहीं होता असली सवाल यह है कि प्राथमिकताएं किनके हित में तय की गई हैं। उनके अनुसार यह बजट कागजों में भले बड़ा दिखाई देता हो लेकिन आमजन की वास्तविक जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं देता। देवांगन ने कहा कि प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है इसके बावजूद किसानों की आय बढ़ाने खेती की लागत घटाने और सिंचाई के विस्तार के लिए कोई स्पष्ट लक्ष्य तय नहीं किया गया है। उनका कहना है कि गांवों की आर्थिक रीढ़ मजबूत किए बिना प्रदेश के सर्वांगीण विकास का दावा खोखला साबित होगा।
गौठान योजना बंद होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित
उन्होंने पूर्व कांग्रेस सरकार की गौठान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना केवल गोवंश सुरक्षा तक सीमित नहीं थी बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन का सशक्त माध्यम बन चुकी थी गौठानों के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला था। वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा इस योजना को बंद कर दिए जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। देवांगन ने कहा कि गोवंश को पूजनीय बताने वाली सरकार के बजट में गौठान या उसके किसी विकल्प का उल्लेख तक नहीं होना ग्रामीण हितों की अनदेखी है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल
शिक्षा क्षेत्र पर टिप्पणी करते हुए देवांगन ने कहा कि हजारों शासकीय पद रिक्त पड़े हैं लेकिन भर्ती के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। डी.एड. प्रशिक्षित अभ्यर्थी महीनों से राजधानी में प्रदर्शन कर रहे हैं फिर भी बजट में उनके लिए स्पष्ट प्रावधान का अभाव है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी और आधारभूत ढांचे की समस्याएं यथावत बनी हुई हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में अपर्याप्त प्रावधान
स्वास्थ्य सुविधाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के नाम पर सीमित राशि रखी गई है जबकि वास्तविक लागत इससे कहीं अधिक है। जिला अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ठोस योजना नजर नहीं आती।
बेरोजगारी और कर्मचारियों के मुद्दे पर सरकार मौन
मनराखन देवांगन ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी गंभीर समस्या का रूप ले चुकी है लेकिन रोजगार सृजन की स्पष्ट रूपरेखा बजट में प्रस्तुत नहीं की गई। संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं रसोइया संघ हड़ताल पर है इसके बावजूद उनके लिए कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने के वादे का भी बजट में उल्लेख नहीं है। अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट संतुलित और समावेशी विकास की दिशा तय करने में असफल दिखाई देता है। जब तक गांव किसान युवा महिला और कर्मचारी वर्ग को केंद्र में रखकर ठोस निर्णय नहीं लिए जाएंगे तब तक विकास के दावे कागजों तक ही सीमित रहेंगे।