खैरागढ़। शिक्षा को बेहतर बनाने और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए सरकारें करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे करती हैं लेकिन वनांचल के एक सरकारी स्कूल की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम लालपुर घाट में नौनिहाल जर्जर छत के नीचे प्लास्टिक की आड़ में पढ़ने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि जब स्कूल का भवन ही सुरक्षित नहीं है तो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना कैसे की जा सकती है? जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सरईपतेरा के आश्रित ग्राम लालपुर घाट स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का भवन पिछले एक साल से जर्जर अवस्था में है। छत का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़कर गिर चुका है और सरिए बाहर दिखाई देने लगे हैं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है। इसके बावजूद 30 से अधिक बच्चे इसी असुरक्षित भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बच्चों को बारिश से बचाने के लिए शिक्षकों ने छत पर प्लास्टिक बिछाकर अस्थायी इंतजाम किया है।
सुविधाओं के अभाव में कहीं शिक्षा से न टूट जाए बच्चों का भरोसा
यह महज एक जर्जर स्कूल भवन की कहानी नहीं बल्कि उन बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है जिनके लिए सरकारी स्कूल ही शिक्षा का सबसे बड़ा सहारा है। शिक्षक, सरपंच और ग्रामीण कई बार भवन की मरम्मत और नए स्कूल भवन की मांग कर चुके हैं लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी उपेन्द्र कुमार देवांगन ने कहा कि उन्हें पहले इसकी जानकारी नहीं थी। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने पर प्राचार्य और संकुल समन्वयक से चर्चा की गई है। बच्चों के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी। जानकारी छिपाने वालों पर कार्रवाई होगी तथा नए भवन के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। अब सवाल सिर्फ नए भवन का नहीं बच्चों की सुरक्षा और भविष्य का है। क्या इन मासूमों को सुरक्षित कक्षाओं में पढ़ने का अधिकार नहीं है? आखिर कब तक सरकारी स्कूलों के बच्चे जर्जर छतों और अस्थायी इंतजामों के भरोसे अपना भविष्य संवारेंगे? शिक्षा विभाग को आश्वासनों से आगे बढ़कर तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे ताकि किसी अनहोनी से पहले बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
