शिक्षा जगत में उत्कृष्ट सेवा देने प्राचार्य डॉ.अग्रवाल को दी गई समारोहपूर्वक विदाई

छात्रों के बीच शिक्षकीय कार्य के साथ अनुशासन प्रेम ने दिलाई ख्याति
17 वर्षों तक खैरागढ़ के कन्या शाला में रही प्राचार्य के पद पर पदस्थ
विद्यालय के साथ ही छात्रों की शैक्षणिक व नैतिक प्रगति पर किया काम
सत्यमेव न्यूज़/खैरागढ़. जिले के सबसे बड़े स्कूल के रूप में ख्यातिप्राप्त शासकीय आदर्श कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विगत 2005 से पदस्थ प्राचार्य डॉ.साधना अग्रवाल को संस्था के शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित छात्राओं द्वारा समारोहपूर्वक भावभीनी विदाई दी गई. समारोह में मुख्य अतिथि डॉ.साधना अग्रवाल व कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला शिक्षा अधिकारी डॉ.केव्ही राव ने की वहीं विशेष अतिथि के रूप में बीईओ नीलम राजपूत, शाला प्रबंधन समिति की अध्यक्षा श्रीमती नसीमा नासिर मेमन, जिला पत्रकार संघ खैरागढ़ के अध्यक्ष अनुराग शांति तुरे, सरंक्षक खिलेंद्र नामदेव, उपाध्यक्ष यतेन्द्रजीत सिंह, युवा पत्रकार विनोद वर्मा व प्रदीप बोरकर सहित एनसीडब्ल्यूसी के प्रदेश अध्यक्ष नदीम मेमन उपस्थित रहे. छात्रों को संबोधित करते हुये डॉ.साधना अग्रवाल ने कहा कि शाला प्रबंधन का कार्य एक मुखिया के रूप संचालित करना बहुत ही कठिन है परंतु सरलता, सहजता, और समन्वय की भावना से आसान हो जाता है. छात्र और अपने सहपाठियों की भावनाओं को समझना आवश्यक है, विचारों में भिन्नता होते हुये भी टीम भावना से साथ चलना, हिम्मत और सम्बल प्रदान करती है.

समुदाय के लोगों के साथ बेहतर संबंध भी सेवा काल को आसान व अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल प्रशासनिक कार्यों को भी सरल बना देता है. डॉ.अग्रवाल ने सेवा काल को सरल, सहज और श्रेष्ठ बनाने वाले सभी विभूतियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि वे सदैव अपने शैक्षिक दायित्वों के लिए तत्पर रहेंगी. अध्यक्षीय आसंदी से डीईओ डॉ.केव्ही राव ने डॉ.अग्रवाल को एक कुशल शिक्षिका के साथ व्यवहारिक, अपने विषय की ज्ञाता, कार्य के प्रति ईमानदार, संस्था के प्रति निष्ठावान, छात्रों के प्रति करुणा और दया, शाला के शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ सहयोगी प्रवृत्ति की कुशल शाला प्रबन्धक बताते हुये कहा कि उनके सानिध्य में रहकर शिक्षकों ने बहुत कुछ सिखा है, छात्राओं को एक नई दिशा और दशा दी है. बीईओ सुश्री नीलम राजपूत ने कहा कि शिक्षक अध्यापन के अतिरिक्त शासन की अन्य कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करता है इसके बावजूद बेहतर प्रशासन कर कठिन कार्य होते हुये पूरे सेवा काल को समाज को समर्पित कर देता है. एक शिक्षक की सेवा को कभी भुलाया नहीं जा सकता.
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुये शाला के प्रभारी प्राचार्य कमलेश्वर सिंह राजपूत ने कहा कि डॉ.अग्रवाल ने विभिन्न संस्थाओं में अपनी सेवाएं देते हुये एक संघर्षशील, शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली, साहित्यकार तथा छत्तीसगढ़ का एक श्रेष्ठ प्राचार्य बताते हुये उनके योगदान को और उनके साथ किये कार्य अनुभव को हमेशा याद रखने की बात की. वरिष्ठ पत्रकार अनुराग शांति तुरे ने एक छात्र के रूप में डॉ.साधना अग्रवाल द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उनके अवदान को अविस्मरणीय बताते हुये छात्रों को उनसे जुड़े दो संस्मरण सुनाये और प्रेरणा लेने आग्रह किया. इस अवसर पर संस्था के शिक्षकगण कुणाल टंडन, श्रीमती तारा सिंह, गिरवर कोसरे, श्रीमती विनीता दीक्षित, गुंजन दीक्षित, अखिलेश श्रीवास्तव, श्रीमती खुम वर्मा, किशोर यादव, सुश्री शिला सिंह, श्रीमती नीलू सिंह, विभाष पाठक, श्रीमती सीता शुक्ला, श्रीमती संगीता सिंह, राजकुमार वर्मा, श्रीमती स्पृहा सिंह, रमेश साहू, श्रीमती तृप्ति दसरिया, श्रीमती उत्तरा साहू, हर्ष मानिकपुरी, सौरभ श्रीवास्तव, कु.भूमिका सिंह, भानु, राधिका, डाकेश्वर व नितेश मंडावी उपस्थित रहे. समारोह का सफल संचालन शिक्षक विभाष पाठक तथा आभार प्रदर्शन कुणाल टंडन ने किया.