
47 किसानों के नाम पर फर्जी खाद वितरण का आरोप
प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। सेवा सहकारी समिति मर्यादित डोकराभाठा में किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से खाद वितरण कर लगभग 16.94 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। मामले में छुईखदान थाना पुलिस ने समिति के प्रबंधक विवेक कुमार मिश्रा तथा तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर जगमोहन जोशी के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी अनुसार सेवा सहकारी समिति डोकराभाठा के प्राधिकृत अधिकारी रामकुमार जोशी ने छुईखदान थाना में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समिति के अंतर्गत आने वाले आठ गांवों के किसानों की जानकारी और अनुमति के बिना उनके नाम पर खाद जारी कर संबंधित राशि का समायोजन किया गया। बताया जाता है कि किसानों द्वारा कलेक्टर खैरागढ़ के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बाद मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी। जांच दल ने संस्था एवं बैंक से प्राप्त दस्तावेजों, खाद वितरण पंजी, किसानों के बयान तथा अन्य अभिलेखों का परीक्षण किया। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि 10 अक्टूबर 2025 को फर्जी तरीके से खाद परमिट जारी कर किसानों के डीएमआर खातों में खाद की राशि समायोजित की गई थी। जांच प्रतिवेदन के अनुसार कुल 47 किसानों के खातों में अनियमितता पाई गई जिससे 16 लाख 93 हजार 866 रुपये 32 पैसे की आर्थिक क्षति हुई। जांच दल ने प्रथम दृष्टया समिति प्रबंधक विवेक कुमार मिश्रा और तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर जगमोहन जोशी की मिलीभगत से गबन एवं वित्तीय अनियमितता होना पाया है। रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों को संयुक्त एवं पृथक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है। जांच दल में शीतल देवांगन (पर्यवेक्षक शाखा खैरागढ़), विरेन्द्र डहरिया (एसडीओ खैरागढ़), दिगम्बर साहू (पर्यवेक्षक शाखा गंडई), प्रेम देवांगन (पटवारी), प्रदीप कुमार भालेकर तथा ज्वाला प्रसाद जंघेल शामिल थे। उल्लेखनीय है कि जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष देवराज किशोर दास वैष्णव एवं जिला किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष दीपक वैष्णव के नेतृत्व में किसानों ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर से की थी। शिकायत के बाद कलेक्टर द्वारा जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। छुईखदान थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 212/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(3), 318(4), 336(3), 338 एवं 340(2) के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है।