
मैनपाट में जमी ओस बन रही बर्फ
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। अधिकांश जिलों में रात का तापमान सामान्य से कई डिग्री नीचे चला गया है। उत्तर छत्तीसगढ़ का मैनपाट प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका बना हुआ है जहां न्यूनतम तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां ओस की बूंदें जमकर बर्फ में तब्दील हो रही हैं। अंबिकापुर में रात का तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जो सामान्य से करीब 5 डिग्री कम है। मैदानी इलाकों में रायपुर सबसे ठंडा रहा जहां पारा 7 डिग्री तक गिर गया। दुर्ग में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री और पेंड्रा रोड में 7.2 डिग्री दर्ज किया गया।
17 जिलों में शीतलहर, 15 में घना कोहरा
मौसम विभाग ने प्रदेश के 17 जिलों में शीतलहर को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही 15 जिलों में घने कोहरे की चेतावनी दी गई है। दोनों अलर्ट के साथ स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी भी जारी की गई है। पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान दुर्ग में 29.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 3.8 डिग्री रहा।
4 जिलों में प्राइमरी स्कूल 10 जनवरी तक बंद
भीषण ठंड को देखते हुए सरगुजा संभाग के चार जिलों सरगुजा बलरामपुर कोरिया और सूरजपुर में प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। हालांकि मिडिल हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों का संचालन पूर्ववत जारी रहेगा। दो पालियों में संचालित होने वाले स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है। अब पहली पाली की कक्षाएं सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक और दूसरी पाली की कक्षाएं दोपहर 12.30 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगी। यह आदेश सभी शासकीय अर्धशासकीय और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर लागू होगा।
अंबिकापुर में ठंड से दूसरी मौत
अंबिकापुर से लगे श्रीगढ़ क्षेत्र में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई। शव पैरावट स्थिति में मिला था। कम कपड़ों में खुले स्थान पर सोने के कारण वह हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गया। अंबिकापुर में ठंड से मौत का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 11 दिसंबर की रात बस स्टैंड परिसर में खुले में सो रहे एक व्यक्ति की भी ठंड से जान चली गई थी।
बच्चों की सेहत पर पड़ रहा ठंड का असर
कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखा जा रहा है। बीते एक महीने में रायपुर स्थित अंबेडकर अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आए हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से ठंडा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं जिससे वे ठंड को सहन नहीं कर पाते। वहीं सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और अधिक रहता है।