
छुईखदान जनपद में बिना बजट करोड़ों के भुगतान का मामला
अनुमोदन से पहले एक भी रुपये का व्यय नहीं करने का आदेश
दोषियों पर कार्रवाई के मिल रहे संकेत
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जनपद पंचायत छुईखदान में वित्तीय वर्ष 2024–25 और 2025–26 के दौरान बिना विधिवत बजट पारित कराए करोड़ों रुपये के भुगतान का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायतों और दस्तावेजों के आधार पर जिला पंचायत प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन प्राप्त हुए बिना किसी भी मद में एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया जाएगा। बहरहाल मामले को वित्तीय अनुशासन की खुली अवहेलना और नियमों को दरकिनार कर सरकारी धन के दुरुपयोग से जोड़कर देखा जा रहा है। शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय करीब एक वर्ष पूर्व जनपद पंचायत के 11 सभापतियों और सदस्यों ने जिला पंचायत खैरागढ़ में लिखित शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रविकुमार द्वारा बिना बजट स्वीकृति लगातार भुगतान किए जा रहे हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम पटेल ने हस्तक्षेप करते हुए छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 और पंचायत (वित्त एवं लेखा) नियमों का हवाला दिया तथा निर्देशित किया कि बिना विधिवत अनुमोदन कोई भी राशि व्यय न की जाए। नियमों के अनुसार प्रत्येक पंचायत को वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने से पूर्व बजट पारित कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन लेना अनिवार्य है। इसके बावजूद आरोप है कि निर्देशों की अनदेखी कर भुगतान जारी रहे। वर्ष 2025–26 के लिए कथित रूप से तैयार बजट को अध्यक्ष के हस्ताक्षर के साथ उपसंचालक, पंचायत विभाग कार्यालय खैरागढ़ को भेजा गया जिसे प्रक्रिया अपूर्ण होने के कारण लौटा दिया गया।
संदिग्ध मदों में हुआ है लाखों का व्यय
शिकायत में जिन व्ययों का उल्लेख है उनमें लगभग 3 लाख रुपये फोटो कॉपी मद में, लगभग 3 लाख रुपये चाय-नाश्ता मद में, 6 लाख रुपये वाहन किराया, लाखों रुपये मरम्मत कार्य, फ्लेक्स, टेंट और माइक संबंधी बिल
हाल ही में 1.05 लाख रुपये का कथित दौरा व्यय
बताया गया है कि इन भुगतानों पर अलग-अलग अवधियों में तत्कालीन सीईओ झुमुक सिंह राजपूत और रविकुमार के हस्ताक्षर हैं। कुछ मामलों में अतिरिक्त सीईओ के संयुक्त हस्ताक्षर भी बताए जा रहे हैं। वित्तीय नियमों के अनुसार बिना अनुमोदित बजट किया गया व्यय “अवैध व्यय” की श्रेणी में आता है और इसकी वसूली संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) से की जा सकती है।
स्थानांतरण के बाद भी चल रहा है विवाद
तत्कालीन सीईओ के स्थानांतरण के बाद प्रभारी सीईओ केश्वरी देवांगन ने कार्यभार संभाला। जनपद की बैठकों में लगातार बिना बजट भुगतान का मुद्दा उठाया जाता रहा। इसके बाद सभापति सुधीर गोलछा और अन्य सदस्यों ने मंत्रालय एवं सचिवालय रायपुर को भी लिखित शिकायत भेजी है। उच्च स्तर से निर्देश मिलने के बाद जिला पंचायत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि 2025-26 का अनुमानित बजट अभी तक सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित नहीं है।
अनुमोदन से पूर्व किसी भी मद में भुगतान, व्यय स्वीकृति या राशि आहरण पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। ऑडिट आपत्ति की दशा में वसूली एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। ज्ञात हो कि बजट अनुमोदन लंबित होने के कारण फिलहाल सभी वित्तीय प्रस्तावों और भुगतानों पर रोक लगा दी गई है। कचरा प्रबंधन हेतु जेम पोर्टल से प्रस्तावित 59 ट्राई साइकिल खरीदी का भुगतान भी रुका हुआ है। इस बीच जेम पोर्टल आईडी-पासवर्ड लीक होने की शिकायत भी सामने आई है जिसकी जांच अपेक्षित है।
न्याय पूर्वक कार्रवाई के लिए जनप्रतिनिधि कर रहे संघर्ष
मामले में न्यायपूर्वक कार्रवाई के लिए जनप्रतिनिधिसंघर्ष कर रहे है। सभापति सुधीर गोलछा ने कहा कि अंतिम कार्रवाई तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। अन्य सभापतियों और सदस्यों डोमर सिंह, ज्योति जंघेल, होमेश्वरी दिनेश वैष्णव, राजिम मुकेश चंदेल, दुष्यंत जंघेल, कुसुम जंघेल, मनोज, संगीता अंजू जंघेल, काशी राम पोर्ते, लीला पवार और जोशी ने संयुक्त रूप से बिना वैध अनुमोदन व्यय की गई राशि की वसूली और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। प्रभारी सीईओ केश्वरी देवांगन ने उच्च कार्यालय को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगे जाने की पुष्टि की है। गौर करें कि जिला निर्माण के बाद मामला केवल जनपद पंचायत का नहीं रह गया है बल्कि स्थानीय स्वशासन में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा है। यदि बिना बजट करोड़ों रुपये का भुगतान संभव है तो यह आंतरिक वित्तीय नियंत्रण तंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाता है। बहरहाल जिला प्रशासन ने संकेत दे दिया है कि अब नियमों से समझौता नहीं होगा। 2025-26 का बजट विधिवत स्वीकृत होने तक किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा। अब जनता की नजर इस बात पर है कि क्या जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होगी या मामला कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाएगा।
