छुईखदान में शहीद दिवस पर क्षेत्रवासियों ने भरी अधिकारों की हुंकार

खैरागढ़/छुईखदान। छुईखदान की धरती पर शनिवार 09 जनवरी की शाम केवल श्रद्धा के दीप नहीं जले बल्कि दशकों से दबा जनाक्रोश भी आंदोलन की लौ बनकर सामने आया। 9 जनवरी 1953 के ऐतिहासिक गोलीकांड की 73वीं पुण्यतिथि पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने उमड़ी हजारों की भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह आयोजन केवल अतीत को स्मरण करने तक सीमित नहीं है बल्कि अब छुईखदान क्षेत्र के भविष्य की एक बड़ी और निर्णायक लड़ाई का संकेत है। हजारों दीपकों की रोशनी के बीच छुईखदान से एक मजबूत और स्पष्ट संदेश निकला कि जिले के नाम से भले ही छुईखदान हट जाए लेकिन छुईखदान को विधानसभा का दर्जा हर हाल में मिलना ही चाहिए।

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मंच पर राजनीति नहीं बल्कि पीड़ा, अधिकार और अस्मिता की बात हुई। भाजपा, कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता और आम नागरिक बिना किसी दलगत पहचान के एक मंच पर एक ही मांग को लेकर खड़े नजर आए। न कोई पार्टी का झंडा था, न कोई राजनीतिक नारा सभी ने केवल छुईखदान के जायज हक की बात रखी यही कारण रहा कि श्रद्धांजलि सभा धीरे-धीरे एक सशक्त जनआंदोलन में तब्दील हो गई।

स्थानीय वक्ताओं और नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को मिलाकर जिला बनना भले ही एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि रही हो लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। जिला बनने के बावजूद प्रशासनिक कार्यालय, अधिकारी, संसाधन और निर्णय प्रक्रिया आज भी केवल खैरागढ़ तक ही सीमित हैं। छुईखदान और गंडई के लोगों का कहना है कि जिला बनने से पहले जैसी परिस्थितियां थी आज भी हालात लगभग वैसे ही बने हुए हैं। प्रशासन तक पहुंच कठिन है और विकास की गति बेहद धीमी।

वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि खैरागढ़, छुईखदान और गंडई तीन अलग भौगोलिक और सामाजिक ईकाइयां हैं। खैरागढ़ से छुईखदान की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है जबकि गंडई इससे भी अधिक दूर स्थित है। ऐसे में तीनों क्षेत्रों को एक ही प्रशासनिक ढांचे में बांधना शुरू से ही अव्यवहारिक रहा है।
इसी असंतोष ने अब एक स्पष्ट मांग का रूप ले लिया है कि छुईखदान को अलग विधानसभा का दर्जा दिया जाए।

शहीद नगरी के अध्यक्ष प्रतिनिधि एवं पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गिरिराज किशोर दास वैष्णव ने कहा कि शहीद नगरी में शहीद दिवस का आयोजन ऐतिहासिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी आंकड़ों में केवल पांच शहीद दर्ज हैं जबकि गोलीकांड के बाद और भी कई लोग शहीद हुए जिनके नाम षड्यंत्रपूर्वक हटा दिए गए। उन्होंने छुईखदान के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1924 में छुईखदान पालिका था, 1926 में यहां बिजली आ चुकी थी। आज भी क्षेत्र के पास अपार जलसंसाधन, डैम और खनिज संपदा है। अगर उनके (बिना नाम लिये) बस में होता तो यहां से सभी खनिज और बांध भी ले जाते। श्री वैष्णव ने साफ शब्दों में कहा कि जिला बनने के बाद छुईखदान को कुछ नहीं मिला। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा अगर छुईखदान के लोग एक हो जाएं तो विधानसभा बनने से कोई नहीं रोक सकता। मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

गिरवर जंघेल ने कहा कि छुईखदान की अस्मिता के लिए जिन बुजुर्गों ने शहादत दी उनकी मांग आज भी अधूरी है। विधानसभा दर्जा आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिला बनाकर तीनों क्षेत्रों को सम्मान दिया लेकिन आज छुईखदान और गंडई के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है जो अनुचित है।

वरिष्ठ समाजसेवी सुधीर जैन ने कहा कि छुईखदान के समुचित विकास के लिए अब यदि शहीद भी होना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए। यह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।

वरिष्ठ समाजसेवी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजा देवराज किशोर दास वैष्णव ने नागरिकों से जागरूक होने और अधिकारों की रक्षा के लिए एकता के सूत्र में बंधने का आह्वान किया। उमाकांत महोबिया ने कहा कि अब इंतजार नहीं बल्कि संघर्ष का समय है। युवा समाजसेवी रोहित पुलत्स्य ने अत्याचार के आगे न झुकने और अधिकारों के लिए डटे रहने की बात कही। संवैधानिक दायरे में आंदोलन का संदेश युवा भाजपा नेता नवनीत जैन ने शहीदों के नाम पर सस्वर गीत प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि दी और संवैधानिक दायरे में रहकर आंदोलन चलाने का आह्वान किया। युवा कांग्रेस नेता गुलशन तिवारी ने कहा कि जिला निर्माण के बाद अधिकांश सुविधाएं खैरागढ़ को मिली हैं जबकि जनसंख्या और क्षेत्रफल समान होने के बावजूद छुईखदान को उपेक्षित रखा गया है। आगे गुलशन ने कहा कि नाम हटाना हो तो हटाइए लेकिन अलग विधानसभा दीजिए।

छुईखदान गोलीकांड में शहीदों के परिजन बलदाऊ प्रसाद महोबिया और यशवंत तिवारी ने कहा कि उनके पूर्वजों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। सभी को ईमानदारी से इस संघर्ष को आगे बढ़ाना होगा। इस बीच कांग्रेस नेता और वरिष्ठ पत्रकार सज्जाक खान ने तेजतर्रार तेवर के साथ कार्यक्रम का संचालन करते हुए शहीदों की स्मृति में सामूहिक मौन धारण कराया और विधानसभा दर्जे की मांग के लिए सभी को संकल्प दिलाया। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष शांतिलाल जैन ने कहा कि अब मांगने से नहीं बल्कि एकजुट संघर्ष से ही अधिकार मिलेगा। आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख रूप से नंद किशोर भट्ट, बलभद्र महोबिया, गजेंद्र ठाकरे, सन्नी महोबिया, रामकुमार पटेल, हेमंत वैष्णव, शैव्या वैष्णव, मनीष कोचर, जेके वैष्णव, प्रकाश महोबिया, विक्रांत चंद्राकर, संजू नेताम, प्रेम पाल, किरण वैष्णव, घना देवांगन, महताब खान, गणेश महोबिया, केके ददरिया, शांति लाल पारख, नितिन कोचर, महावीर सांखला, शैलेश जैन, नवीन साह, दूजराम साहू, गिरीश श्रीवास, नीरज महोबिया, कमलेश यादव सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

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