
किसानों से भेदभाव और वसूली के लग रहे आरोप
छुईखदान। नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। क्षेत्र में पदस्थ पटवारी और आरआई (राजस्व निरीक्षक) के बीच सांठगांठ जैसी स्थिति बनी हुई है जिसके कारण आम किसानों के कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं। जब किसान सीमांकन, नक्शा सुधार या अन्य राजस्व कार्यों के लिए संबंधित अधिकारियों के पास पहुंचते हैं तो उनके काम को बार-बार टाल दिया जाता है या उन्हें अलग-अलग बहाने बनाकर घुमाया जाता है। इससे किसानों को अनावश्यक परेशानी और समय की बर्बादी झेलनी पड़ती है। जहां आम किसान महीनों तक अपने काम के लिए भटकते रहते हैं वहीं दलालों के माध्यम से आने वाले मामलों को प्राथमिकता दी जाती है और उनका काम जल्दी निपटा दिया जाता है। इस व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कार्य करने के एवज में पैसे की मांग की जाती है जिससे गरीब किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। मजबूरी में कई किसानों को अपना काम करवाने के लिए यह राशि देने पर विवश होना पड़ता है। इस तरह की कार्यप्रणाली से न केवल किसानों का भरोसा प्रशासन से उठ रहा है बल्कि यह व्यवस्था ईमानदार व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।ग्रामीणों और किसान प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

