छत्तीसगढ़ प्राचार्य एसोसिएशन ने भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 में संशोधन की मांग की

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। छत्तीसगढ़ प्राचार्य एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 में व्यापक विसंगतियों का आरोप लगाते हुए संशोधन की मांग की है। संगठन के जिला संयोजक डॉ.कमलेश्वर सिंह ने 13 फरवरी 2026 को जारी राजपत्र में प्रकाशित नियमों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया है। डॉ.कमलेश्वर सिंह ने कहा कि यह नियम शिक्षक (एलबी) संवर्ग को आगे बढ़ने से रोकने वाला प्रतीत होता है। उन्होंने प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर विभिन्न बिंदुओं पर संशोधन के सुझाव प्रस्तुत किए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि नियम 4 सेवा का गठन में उपबंध (ड) जोड़ते हुए स्पष्ट किया जाए कि शिक्षक पंचायत/ननि संवर्ग की 8 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के पश्चात स्कूल शिक्षा विभाग में संविलयन से पूर्व की सेवा की गणना करते हुए उसे निरंतर सेवा माना जाए। इसी प्रकार नियम 6 की अनुसूची-दो सरल क्रमांक 19 के कॉलम 2 में प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए अपने पद पर नियुक्ति/पदोन्नति तिथि से व्याख्याता (एलबी) एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय प्रधान पाठक को जोड़ा जाए। सरल क्रमांक 21 की टिप्पणी में शिक्षक–शिक्षिकाओं (एलबी) प्रधान पाठक प्राथमिक को शामिल करने की मांग की गई है। सरल क्रमांक 23 की टिप्पणी कॉलम से प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक विद्यालय को विलोपित कर 5 वर्ष अनुभवी व्याख्याता/व्याख्याता (एलबी) को सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी पद पर प्रतिनियुक्ति का उल्लेख करने का सुझाव दिया गया है। नियम 8 की अनुसूची तीन सरल क्रमांक 4 में सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी की सीधी भर्ती के लिए शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता में स्नातकोत्तर के साथ डीएड/बीएड प्रशिक्षित होना अनिवार्य किया जाए वहीं सरल क्रमांक 10 में उपसंचालक/जिला शिक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति के लिए प्राचार्य एवं प्रशासनिक पद पर अनुभव 10 वर्ष के स्थान पर 5 वर्ष करने तथा प्रशिक्षित होने की शर्त जोड़ी जाए। साथ ही वर्ष 2015-16 में नियुक्त सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं वर्तमान विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को डीएड/बीएड प्रशिक्षण के लिए चार वर्ष की अवधि में विभागीय पत्राचार से प्रशिक्षित होने का अवसर प्रदान करने की मांग की गई है। डॉ.कमलेश्वर सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों से पूर्णकालिक प्राचार्यों एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के बीच प्रशासनिक समन्वय स्थापित करने में सुविधा होगी तथा अनावश्यक प्रशासनिक विवादों से बचा जा सकेगा।

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