
कलेक्टर दर पर वेतनमान की मांग
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। छत्तीसगढ़ स्कूल मध्यान्ह भोजन रसोईया संयुक्त संघ के आह्वान पर राजधानी रायपुर में रसोईयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। हड़ताल पर बैठी रसोईयां कलेक्टर दर पर वेतनमान, सेवा सुरक्षा और स्थायीकरण की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही हैं। संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि वर्ष 1995 से केंद्र सरकार की मध्याह्न भोजन योजना के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में रसोईयां बच्चों को भोजन उपलब्ध करा रही हैं। वर्ष 2007 में योजना के विस्तार के बाद माध्यमिक शालाओं में भी रसोईयों की सेवाएं ली जा रही हैं। शासन के निर्देशानुसार ग्राम पंचायतों के माध्यम से रसोईयों की नियुक्ति की गई परंतु उन्हें आज तक न्यूनतम मजदूरी का लाभ नहीं मिल सका। ज्ञापन में उल्लेख है कि रसोईयां प्रतिदिन लगभग 5 घंटे (सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक) कार्य करती हैं इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता। वर्तमान में उन्हें अत्यंत अल्प मानदेय दिया जा रहा जो बढ़ती महंगाई के दौर में जीवनयापन के लिए अपर्याप्त है। संघ केजिला अध्यक्ष टीकम कोठले का कहना है कि अधिकांश रसोईयां गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही हैं और वर्षों से इसी नौकरी को सहारा मानकर कार्य कर रही हैं। शासन की अनदेखी पर श्री कोठले ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या कम होने का हवाला देकर रसोईयों को हेडमास्टर महिला समूहों के माध्यम से कार्य से हटाया जा रहा है जिससे उनका रोजगार असुरक्षित हो गया है। शासन-प्रशासन के पास बार-बार गुहार लगाने के बावजूद अब तक न्याय नहीं मिला जिससे मजबूर होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रमुख मांगें रसोईयों को कलेक्टर दर पर मानदेय दिया जाए। छात्र संख्या कम होने के आधार पर रसोईयों को हटाने की प्रक्रिया तत्काल बंद की जाए। अंशकालीन की जगह रसोईयों को पूर्णकालीन का दर्जा दिया जाए। संघ ने मुख्यमंत्री से मांगों पर संवेदनशीलता और गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। रसोईयों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक उनकी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।