गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

संगोष्ठी के समापन समारोह में उपस्थित हुये शिक्षाविद
गंडई पंडरिया। शासकीय महाविद्यालय गंडई में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर अपने विचार साझा करते हुए गहन अकादमिक मंथन किया। संगोष्ठी में 140 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा की। दो दिनों तक चले इस अकादमिक आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता, उसकी समकालीन उपयोगिता तथा विकसित भारत के निर्माण में उसकी भूमिका पर व्यापक विमर्श हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री अजय मंडावी रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में जनजातीय शिल्प परंपरा को आधुनिक रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान और कौशल को वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप विकसित कर युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ.सुरेश पटेल ने अपने विचार रखते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिकता और उसकी वैश्विक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ.महेश श्रीवास्तव, डॉ.भुवाल सिंह, डॉ.सियाराम शर्मा और डॉ.अवधेश श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ.डी.पी. कुर्रे के कुशल नेतृत्व तथा प्राचार्य डॉ.एन.एस. वर्मा के संरक्षण और मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा आयोजक दल का महत्वपूर्ण योगदान रहा वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष लाल टाकेश्वर शाह खुशरो का भी आयोजन में विशेष सहयोग रहा।महाविद्यालय में आयोजित यह पहला बड़ा राष्ट्रीय सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न होकर संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और मील का पत्थर सिद्ध हुआ।


