Uncategorizedशिक्षा

खैरागढ़ विश्वविद्यालय के लोक संगीत विभाग में स्मरण कार्यक्रम का आयोजन

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के लोक संगीत विभाग में स्मरण: सिद्धेश्वर सेन व मदन निषाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कुलपति प्रो.लवली शर्मा के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ जबकि अध्यक्षता लोक संगीत एवं कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो.राजन यादव ने की। कार्यक्रम की शुरुआत मध्यप्रदेश के लोकनाट्य माच के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले स्व.सिद्धेश्वर सेन तथा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध नाट्य शैली नाचा को देश विदेश तक पहचान दिलाने वाले मूर्धन्य कलाकार स्व.मदन निषाद के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद लोक संगीत विभाग के शोधार्थी भुनेश्वर साहू ने सिद्धेश्वर सेन के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सीमित औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने मध्यप्रदेश के लोकनाट्य माच को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपना पूरा जीवन इस लोकनाट्य परंपरा के संरक्षण और संवर्धन को समर्पित किया। सिद्धेश्वर सेन इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के लोक संगीत विभाग में अतिथि शिक्षक के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।कार्यक्रम में शोधार्थी नम्रता अलेंद्र ने छत्तीसगढ़ की लोकनाट्य शैली नाचा को नई पहचान दिलाने वाले कलाकार मदन निषाद के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक छोटे से गांव से निकलकर मदन निषाद ने अपनी प्रतिभा के दम पर नाचा को देश विदेश तक पहुंचाया और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई। इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने नाचा गीत की प्रस्तुति भी दी। गायन में छात्रा ईशा बघेल, साक्षी, सुधा और हर्षलता साहू ने भाग लिया जबकि वाद्य संगत में डॉ. बिहारी लाल तारम बैंजो डॉ. परमानंद पाण्डेय हार्मोनियम डॉ. राजकुमार पटेल मंजीरा कामेश साहू ढोलक तथा कुलदीप तबला ने सहयोग दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने नाचा गीत की प्रस्तुति देने वाले कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि लोक नृत्य और लोक संगीत की परंपराओं के विभिन्न आयामों पर शोध की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इन परंपराओं से प्रेरणा लेने और लोक संगीत के साथ अन्य विषयों का भी अध्ययन कर बहुआयामी प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रेरित किया। अधिष्ठाता प्रो. राजन यादव ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन पर जोर देने की सलाह दी और ऐसे आयोजनों में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने समर कैंप में अभिव्यक्ति कौशल विषय शामिल करने का सुझाव भी दिया ताकि विद्यार्थियों में मंच संचालन और माइक सेंस का विकास हो सके। संगतकार डॉ. नत्थू तोड़े ने सिद्धेश्वर सेन के लोक संगीत विभाग में अतिथि शिक्षक के रूप में बिताए गए समय से जुड़े संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम संयोजक एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपशिखा पटेल ने किया जबकि आभार प्रदर्शन अतिथि व्याख्याता डॉ. परमानंद पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर डॉ. नत्थू तोड़े, डॉ. राजकुमार पटेल, डॉ. परमानंद पाण्डेय, डॉ. विधा सिंह, अभिनव महोबिया और अनिल टंडन सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

Satyamev News

आम लोगों की खास आवाज

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page