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खैरागढ़ राज परिवार के वरिष्ठ सदस्य लाल राजेंद्र सिंह का दुःखद निधन

खैरागढ़। खैरागढ़ राज परिवार के वरिष्ठ सदस्य, प्रतिष्ठित व्यवसायी और भारतीय जनता पार्टी के प्रभावशाली नेता लाल राजेंद्र सिंह का शनिवार 17 अक्टूबर को सुबह 10 बजे रायपुर स्थित सुयश हॉस्पिटल में निधन हो गया। वे 51 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से खैरागढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और व्यावसायिक जगत से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उनके जाने से खैरागढ़ अंचल ने एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया जिसकी पहचान राजनीतिक सक्रियता, बेबाक कार्यशैली, जनसेवा और राज परिवार के प्रति गहरी निष्ठा से थी। लाल राजेंद्र सिंह अपने पीछे माता-पिता, दो पुत्रियों आध्या सिंह (राशि) व लावण्या सिंह (लवी) सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके व्यक्तित्व का एक पक्ष राजनीति और व्यवसाय से जुड़ा था तो दूसरा धार्मिक आस्था, सामाजिक सरोकारों और जरूरतमंदों की सेवा के प्रति समर्पित भी था। मां दुर्गा के अनन्य भक्त के रूप में उनकी विशेष पहचान थी। मंदिर निर्माण से लेकर पदयात्रियों की सेवा तक वे धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में अग्रणी रहते थे।

लाल राजेंद्र सिंह पिता चिंताहरण सिंह की गिनती भाजपा के प्रभावशाली नेताओं में होती थी। बढ़ईटोला क्षेत्र और पांडादाह मंडल में उनकी अच्छी राजनीतिक पकड़ थी। जनपद पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि के रूप में भी उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। वे इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कार्यकारिणी के सदस्य रह चुके थे और विश्वविद्यालय तथा छात्रों के हित में मुखरता से अपनी बात रखा करते थे। वर्तमान में वे सेवा सहकारी समिति, बढ़ईटोला के अध्यक्ष के रूप में नामित थे। कृषि, उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी। एक उन्नतिशील कृषक और सफल व्यवसायी के रूप में उनका क्षेत्र में सम्मान था।

शनिवार को दाऊचौरा स्थित उनके निज निवास से अंतिम यात्रा निकाली गई जो लालपुर मुक्तिधाम पहुंची। अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राज परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, भाजपा नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, समर्थक और परिचित पहुंचे। नम आंखों से सभी प्रतिष्ठित लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

उनके व्यापक जनसंपर्क और क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता के कारण शनिवार की शाम बड़ी संख्या में नागरिक उनके निज निवास पहुंचे। दाऊचौरा में अंतिम यात्रा के दौरान भारी भीड़ के चलते शाम करीब 4 बजे लगभग आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। पुलिस प्रशासन की मदद से स्थिति सामान्य होने के बाद आवागमन बहाल किया गया।

लाल राजेंद्र सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया जब उनकी ज्येष्ठ पुत्री आध्या सिंह (राशि) ने लालपुर मुक्तिधाम में उन्हें मुखाग्नि दी। उन्होंने पुत्र की भांति अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कर अपने पिता को नम आँखों से परिजनों के साथ अंतिम विदाई दी। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। पिता के प्रति पुत्री के प्रेम, साहस और दायित्वबोध ने शोकाकुल माहौल को और गहरा कर दिया। उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।

खैरागढ़ राज परिवार के प्रति लाल राजेंद्र सिंह की निष्ठा और पारिवारिक संबंधों के प्रति उनका समर्पण उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा था। राज परिवार के सुख-दुःख में सदैव साथ खड़े रहने वाले लाल राजेंद्र सिंह को एक मजबूत, मुखर और समर्पित प्रतिनिधि के रूप में सदैव याद किया जाएगा। उनके निधन से परिवार, समर्थकों, शुभचिंतकों और क्षेत्र के लोगों को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उनकी सक्रियता, सामाजिक सहभागिता और जनसेवा से जुड़ी स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के बीच बनी रहेंगी। अंतिम यात्रा में लोग कहते रहे नहीं रहा राज परिवार का शेर।

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