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खैरागढ़ में वन अग्नि प्रबंधन पर वृत्त स्तरीय कार्यशाला का वृहद आयोजन

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। वन अग्नि को राष्ट्रीय आपदा मानते हुए इसकी रोकथाम, पूर्व तैयारी और त्वरित नियंत्रण को लेकर वन विभाग ने आगामी अग्नि सीजन से पहले कमर कस ली है। इसी क्रम में वन वृत्त दुर्ग के तत्वावधान में खैरागढ़ में एक दिवसीय वृत्त स्तरीय कार्यशाला आयोजित कर अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अग्नि सुरक्षा श्रमिकों को एकीकृत रणनीति, फील्ड स्तर पर सजगता और जन-जागरूकता पर विशेष दिशा-निर्देश दिए गए। ज्ञात हो कि वन अग्नि प्रबंधन को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वन वृत्त दुर्ग के तत्वावधान में एक दिवसीय वृत्त स्तरीय कार्यशाला का आयोजन वनमंडल खैरागढ़ द्वारा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त श्रीमती मर्सी बेला ने की। कार्यशाला में दुर्ग वृत्त के अंतर्गत खैरागढ़, कवर्धा, दुर्ग, राजनांदगांव, मानपुर-मोहला एवं बालोद वनमंडलों के वनमंडलाधिकारी, उपवनमंडलाधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी, परिक्षेत्र सहायक तथा अग्नि सुरक्षा श्रमिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस दौरान आगामी अग्नि सीजन के मद्देनज़र वन अग्नि की रोकथाम, पूर्व तैयारी, त्वरित नियंत्रण एवं प्रभावी प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त ने निर्देश दिए कि अग्नि सीजन प्रारंभ होने से पूर्व सभी अधिकारी-कर्मचारी पूर्ण रूप से सतर्क रहें। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर अग्नि पंक्तियों (फायर लाइनों) की समयबद्ध सफाई सुनिश्चित की जाए तथा पिछले वर्षों में हुई अग्नि घटनाओं का विश्लेषण कर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि आग की घटनाओं की संख्या न्यूनतम हो सके। वनमंडलाधिकारी खैरागढ़ पंकज ठाकुर द्वारा प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया गया कि वन अग्नि को राष्ट्रीय आपदा माना गया है। इसके तहत लक्ष्य निर्धारित कर वनों में आग न लगने देने, आग के फैलाव को रोकने तथा आग लगने की स्थिति में त्वरित नियंत्रण की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सूचना मिलते ही नियंत्रण कक्ष के माध्यम से शीघ्र कार्रवाई करने एवं अस्थायी अग्नि नियंत्रण केंद्र स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यशाला में वन अग्नि के प्रमुख कारणों यथा तेंदूपत्ता कटाई, महुआ संग्रहण, पिकनिक के दौरान लापरवाही, ग्रामीणों द्वारा कृषि एवं बाड़ी सफाई के दौरान आग लगाना, शिकार के उद्देश्य से आग लगाना, राहगीरों द्वारा बीड़ी-सिगरेट फेंकना, विद्युत स्पार्क, होली की रात तथा ईंट-भट्टा निर्माण पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही वन अग्नि से होने वाले दुष्प्रभावों जैसे भू-जल स्तर में गिरावट, जलस्रोतों का सूखना, मिट्टी की उर्वरता में कमी, पत्तों का जलना, फसल एवं जैव विविधता को होने वाली क्षति की जानकारी दी गई।

अग्नि सुरक्षा की पूर्व तैयारी के तहत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यालय में उपलब्ध रहने, वन प्रबंधन समितियों की बैठकें आयोजित करने, कंट्रोल रूम सक्रिय रखने, संवेदनशील बीटों की पहचान, अग्नि सुरक्षा श्रमिकों का चयन तथा अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच एवं आवश्यक मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए। अग्नि सुरक्षा श्रमिकों को टॉर्च, छड़ी, जूते, पानी की बोतल, गमछा, टी-शर्ट एवं फायर ब्लोअर जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया।

जन-जागरूकता के लिए हाट-बाजारों एवं दीवारों पर पोस्टर लगाने, विद्यालयों में चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता तथा नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की बात कही गई।

उपग्रह (सैटेलाइट) के माध्यम से प्राप्त अग्नि सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई कर आग पर शीघ्र नियंत्रण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। कार्यशाला में कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रावल ने अंतर्विभागीय समन्वय पर जोर देते हुए राजस्व, पुलिस, दमकल एवं पंचायत विभाग से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा जताई तथा अग्नि के मूल कारणों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के अंत में दुर्ग वृत्त के विभिन्न वनमंडलों से आए अधिकारियों, परिक्षेत्र अधिकारियों, परिक्षेत्र सहायकों एवं अग्नि प्रहरियों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला का समापन मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त के अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ हुआ।

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