
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले के शेरगढ़ गांव में उस समय अजीबोगरीब और कौतूहलपूर्ण स्थिति बन गई जब ग्रामीणों ने एक दुर्लभ दिखने वाले पक्षी को गरुड़ भगवान समझकर पूजा शुरू कर दी। कुछ घंटों तक यह पक्षी श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना रहा लेकिन बाद में वन्यजीव विशेषज्ञों की जांच में स्पष्ट हुआ कि वह कोई दिव्य पक्षी नहीं बल्कि बार्न आउल (उल्लू की एक प्रजाति) का बच्चा था।
गरुड़ भगवान मानकर ग्रामीण पूजने लगे उल्लू के बच्चे को
जानकारी अनुसार गांव के कर्मा भवन में एक रहस्यमयी पक्षी शांत मुद्रा में बैठा दिखाई दिया। बड़े-बड़े आंख, गोल सफेद चेहरा और अलग तरह के स्वरूप ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया। देखते ही देखते यह खबर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में फैल गई कि गरुड़ भगवान स्वयं प्रकट हुए हैं। इसके बाद पूजा-पाठ शुरू हो गया और सैकड़ों लोग मोबाइल कैमरों से वीडियो बनाने लगे। कुछ ही देर में यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। हालांकि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे पक्षी विशेषज्ञों और वन्यजीव जानकारों ने स्थिति स्पष्ट की। जांच में पता चला कि जिसे गरुड़ समझा जा रहा था वह दरअसल बार्न आउल का बच्चा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रजाति के उल्लू के बच्चे देखने में इतने अलग होते हैं कि पहली नजर में लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। बार्न उल्लू के बच्चे का चेहरा गोल और सफेद होता है आंखें बड़ी होती हैं और शरीर पर मुलायम रोएं होते हैं। जिससे वह किसी रहस्यमयी या दिव्य पक्षी जैसा प्रतीत होता है। वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि बार्न उल्लू निशाचर होता है और दिन के समय प्रायः शांत व सुनसान स्थानों, पुराने भवनों या खंडहरों में बैठा रहता है। उड़ान से पहले इसके बच्चे अक्सर जमीन या इमारतों के कोनों में दिखाई दे जाते हैं जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि बार्न उल्लू किसानों के लिए पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यंत उपयोगी पक्षी है जो खेतों में चूहों और कीटों को नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखता है। पक्षी विज्ञानी प्रतीक ठाकुर ने कहा कि शेरगढ़ की यह घटना केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है बल्कि यह इस बात को भी दर्शाती है कि आज के समय में भी अंधविश्वास और वैज्ञानिक सोच के बीच टकराव बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बार्न उल्लू वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है और इसके साथ छेड़छाड़ करना या पकड़ना कानूनन अपराध है। बहरहाल शेरगढ़ गांव में गरुड़ भगवान का प्रकट होना भले ही भ्रम साबित हुआ हो लेकिन यह घटना लोगों को प्रकृति, वन्यजीवों और वैज्ञानिक जागरूकता के महत्व का संदेश जरूर दे गई। कुदरत का यह सच्चा प्रहरी कुछ घंटों के लिए पूज्यनीय बना और फिर सच सामने आते ही आम लेकिन बेहद जरूरी पक्षी के रूप में पहचाना गया।