खुले बाजार में खपाया जा रहा फोर्टीफाइड चांवल, अधिकारी नहीं कर रहे निरीक्षण

सत्यमेव न्यूज/खैरागढ़. राशन दुकानों में दिये जाने वाले मिट्टी तेल को जब मार्केट में धड़ल्ले से खपाया जाने लगा तो सरकार ने मिट्टी तेल का रंग बदल कर नीला कर दिया. सरकार के इस कदम के बाद मिट्टी तेल की कालाबाजारी में पूरी तरह रोक तो नहीं लग पायी लेकिन इसकी अवैध खरीदी बिक्री में काफी हद तक कमी आ गई, संभवत: इसी सफलता के चलते ठीक यहीं फार्मूला राशन दुकानों में दिये जा रहे जो चांवल मे अपनाया गया है. खबर हो कि बीते लगभग दो साल से अविभाजित राजनांदगांव जिले के आकांक्षी जिला होने के कारण प्रदेश सरकार द्वारा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के सभी राशन दुकानों मे फोर्टीफाइड चावल का आबंटन शुरू किया गया. जानकार बताते हैं कि इस चांवल को यदि खुले बाजार में खपाया गया और रिसाइकलिंग की गई तो ऐसा अवैध व्यापार करने वालों का भांडा फूट सकता है और उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती हैं, लेकिन खैरागढ़ जिले में प्रशासन की लापरवाही किसी से छिपी नहीं हैं और अधिकारियों द्वारा समय पर निरीक्षण नहीं होने से भांडा, भांडे की भीतर ही रह गया हैं जिससे जिले के बाजार में संचलित राशन दुकानों में बेरोकटोक धड़ल्ले से फोर्टीफाइड चांवल की कालाबाजारी की जा रही है और अगर बाजार में बिक रहे सरकारी चांवल की सैंपलिंग की जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. फोर्टीफाइड चावल को लेकर जानकार बताते हैं कि सरकारी राशन दुकानों से अभी मिल रहा चांवल कोई सामान्य चांवल नही है.
समान्य से अलग है होता हैं फोर्टीफाइड चांवल
फोर्टीफाइड चांवल मे आयरन, फोलिक एसिड और विटमिन बी-12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व या माइक्रोन्यूट्रीएंट्स मिलाए गए है. आयरन एनीमिया से बचाव करता है, फोलिक एसिड खून बनाने में सहायक होता है और विटमिन बी-12 नर्वस सिस्टम में मदद करता हैं. छत्तीसगढ़ में महिलाओं व बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की समस्या व्यापक हैं. इसी के चलते फोर्टीफाइड चांवल राशन दुकानों में शासन द्वारा दिया वितरित किया जा रहा है. फोर्टीफाइड चांवल वितरण का दूसरा कारण यह भी है कि प्रदेश में हर माह लाखों क्विंटल चांवल बेरोकटोक खुले बाजार में बिक रहा है. फि र रिसाइकिल होकर यह फिर लोगों तक पहुंच रहा है शासन को भी यह बात पता है लेकिन रोक नहीं लग पा रही है. बताया जाता हैं कि सरकार की इस नाकामी की वजह यह हैं कि लोग खुद ही चांवल राशन दुकानदार या फि र किसी भी किराना दुकानदार या व्यापारी को कुछ रूपयों के लालच में बेच रहे है.
जांच में मिलेंगें सूक्ष्म तत्व, अलग नही कर सकते
खुले में बिक रहे सरकारी फोर्टीफाइड चावल की अगर जांच की जाये तो आसानी से यह पकड़ में आ जायेगा, जानकार बताते हैं कि फोर्टीफाइड चावल में सूक्ष्म तत्वों की भरमार हैं जिसे अलग नहीं किया जा सकता. बता दे कि सामान्य चांवल में मिलिंग व पॉलिशिंग के समय फैट व सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर चोकर की परतें हट जाती है. पॉलिशिंग से 75-90 प्रतिशत विटामिन निकल जाते है पोषक तत्व खत्म हो जाते है फोर्टीफाइड करने से चावल में सूक्ष्म पोषक तत्व न सिर्फ फि र से जुडते है बल्कि और ज्यादा मात्रा में मिलने से चांवल और ज्यादा पौष्टिक बन जाता है. इसी कारण फोर्टीफाइड चांवल का वितरण किया जा रहा है ताकि चावल की रिसाइकिल करने की कोशिश करेगा तो सैंपलिंग के बाद उसके पकड़े जाने की पूरी संभावना है.
बिक चुका है 5 करोड़ से अधिक का चांवल पर अधिकारी खेल रहे नोटिस का खेल
केसीजी जिले के 218 राशन दुकान 8 हजार क्विंटल चांवल का शार्टेज आया है जिसमें खैरागढ़ के 120 दुकानों में 5267 क्विंटल तथा छुईखदान के 98 दुकानों मे 3102 क्विंटल चांवल की कमी पाई गई है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये चांवल खुले बाजार में सेल्समेन द्वारा बेचा गया होगा, जो अभी बाजार भाव के हिसाब से 5 करोड़ का चांवल है, जिले के अधिकारी इतने सुस्त है कि सेल्समेन पर कार्रवाही के बजाये दोनों तरफ से नोटिस- नोटिस का खेल चल रहा है.
कोई दुकानदार नहीं देगा चांवल का बिल
राइस मिलर भी यह जानते हैं कि फोर्टीफाइड चांवल समान्य चांवल नहीं है इसकी जांच कर आसानी से पता लगाया जा सकता हैं. यदि किसी दुकानदार के यहां फोर्टीफाइड चांवल मिलता हैं और वहां इसे समान्य चांवल बताता है पूछताछ में उससेेेेेेेेेे बिल मांगे जाने पर वह उसका बिल नहीं दे सकता क्योंकि विक्रेता इस चांवल का बिल देकर सीधे तौर पर फं सना नहीं चाहेगा. शासन के निर्देश पर मिलों में ही यह पौष्टिक चांवल तैयार होकर राशन दुकानों में आता है.
जानिये मामले में क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
फोर्टीफाइड चांवल के गड़बड़ घोटाले को लेकर हमने न केवल नये जिले केसीजी के जिला खाद्य अधिकारी से बात बल्कि खाद्य निरीक्षकों से भी मामले में उनका पक्ष जानने की कोशिश की. सबसे पहले छुईखदान में पदस्थ खाद्य निरीक्षक गरिमा सोरी से उनके दूरभाष पर लगातार संपर्क किया गया, पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया, महकमे के अलावा अन्य लोग बताते हैं कि मैडम कॉल रिसीव नहीं करती, अगर बात करनी हो तो उन्हें ढूंढऩा पड़ता हैं, जिला अधिकारी भी परेशान हैं ऐसा कलेक्ट्रेट की जिला खाद्य शाखा में खबर मिली. इसके बाद खैरागढ़ के खाद्य निरीक्षक विनोद सागर से संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुये साफ कह दिया कि आप जिला अधिकारी से बात कर लीजिये. अंतत: जिला खाद्य अधिकारी भुनेश्वर चेलक ने खाद्य विभाग का पक्ष रखते हुये कहा कि अब तक शिकायत नहीं मिली हैं, शिकायत मिली तो अवश्य कार्यवाही होगी वहीं बाजार में दुकानों के निरीक्षण के सवाल पर उन्होंने सारा दोष अपने मातहत खाद्य निरीक्षकों पर मढ़ दिया.