
छुईखदान। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत काबिज पात्र हितग्राहियों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए शासन ने 31 मार्च तक मिशन मोड में अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। योजना के अंतर्गत नगर निकायों में सर्वे कर पात्र लोगों की पहचान कर उन्हें लाभ देने की बात कही गई है लेकिन छुईखदान नगर पंचायत में जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल शुरू नहीं हो पाई है न तो सर्वे कार्य प्रारंभ हुआ है और न ही आवेदन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आए हैं। लंबित प्रकरणों का अंबारस्थिति यह है कि वर्ष 2023 से आवास योजना के कई प्रकरण लंबित पड़े हैं। जिन हितग्राहियों के दस्तावेज पूर्ण हैं उनका भी कार्य आगे नहीं बढ़ सका है। इस बीच नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा भी इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
पारदर्शिता पर उठ रहे है सवाल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कुछ ठेकेदारों से जुड़े प्रकरणों को प्राथमिकता देते हुए स्वीकृति दी गई है जबकि वास्तविक जरूरतमंदों के आवेदन अब तक लंबित हैं। इससे योजना की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।*क्या कहते है नगर पंचायत के सीएमओ*नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी कुलदीप झा का कहना है कि शासन स्तर पर योजना की घोषणा तो हुई है लेकिन अब तक विस्तृत गाइड लाइन प्राप्त नहीं हुई है। गाइडलाइन मिलते ही सर्वे और आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जांच की हो रही मांग
मामले से जुड़े स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की बात कही है ताकि लंबित प्रकरणों और स्वीकृत आवासों की पारदर्शी जांच हो सके और वास्तविक पात्रों को योजना का लाभ मिल सके। बहरहाल 31 मार्च की समयसीमा नजदीक है लेकिन छुईखदान में न तैयारी दिख रही है और न ही पुरानी समस्याओं का समाधान। ऐसे में योजना की सफलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।