
एसआईआर के नाम से लोकतंत्र के साथ हो रहा खिलवाड़- गुप्ता
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। आम आदमी पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया है। आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता ने जारी बयान में कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता के नाम पर चल रही यह प्रक्रिया ज़मीनी स्तर पर भारी अव्यवस्था, पारदर्शिता की कमी और गंभीर लोकतांत्रिक उल्लंघनों से ग्रस्त है। SIR के दौरान बिना कारण, बिना सूचना और बिना सुनवाई के हजारों पात्र, जीवित और स्थायी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए जो सीधे तौर पर नागरिकों के संवैधानिक मताधिकार पर हमला है। पार्टी राज्य में 27 लाख 34 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से अब तक 2 लाख 74 हजार से अधिक नागरिकों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है। राज्य में 7 नवंबर से शुरू हुई यह प्रक्रिया केवल 45 दिन चली, जबकि इसे कम से कम 6 महीने का समय दिया जाना चाहिए था। दावा आपत्ति की अवधि 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तथा सुनवाई व वेरिफिकेशन 14 फरवरी 2026 तक रखी गई है जो पूरी तरह अपर्याप्त है। अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जानी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में SIR के दौरान मतदाताओं की संख्या कम होने के बावजूद 8 महीने की समय-सीमा दी गई थी फिर अब कम समय क्यों? श्री गुप्ता ने SIR सूची में गंभीर खामियों का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से मतदान कर रहे मतदाताओं के नाम अचानक गायब हैं। कई क्षेत्रों में बीएलओ द्वारा घर-घर भौतिक सत्यापन नहीं हुआ बावजूद इसके रिपोर्ट में सत्यापन पूर्ण दर्शाया गया। नागरिकों से न तो मुलाकात हुई और न ही हस्ताक्षर लिए गए। आदिवासी, वनांचल, पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों की भौगोलिक वास्तविकताओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रक्रिया के कारण गरीब, बुजुर्ग और ग्रामीण मतदाता प्रभावित हुए। OTP, ऑनलाइन फॉर्म और ऐप आधारित प्रणाली के चलते डिजिटल संसाधनों से वंचित नागरिक बाहर रह गए। आधार को लेकर भ्रम और दबाव की स्थिति बनी जबकि आधार अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा बाहरी राज्यों के संदिग्ध नाम जुड़ने और स्थानीय नागरिकों के नाम हटने की शिकायतें भी सामने आई हैं। डुप्लीकेट जांच के लिए पारदर्शी तकनीकी व्यवस्था और जवाबदेही का भी अभाव रहा। आम आदमी पार्टी की मांग है कि वर्तमान SIR प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए बिना कारण हटाए गए सभी नामों को अस्थायी रूप से तुरंत बहाल किया जाए और पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए। BLO और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। दावा-आपत्ति, सुनवाई और वेरिफिकेशन की समय-सीमा 6 महीने बढ़ाई जाए। आधार को लेकर स्पष्ट लिखित निर्देश जारी हों कि यह अनिवार्य नहीं है तथा ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में ऑफलाइन विशेष शिविर लगाए जाएँ। श्री गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि निर्वाचन आयोग ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाएगी। उन्होंने कहा कि मताधिकार कोई एहसान नहीं बल्कि यह भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार है।