
कलश यात्रा, विशाल बाइक रैली और हनुमंत अभिषेक से होगा भव्य शुभारंभ
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। छत्तीसगढ़ की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान माने जाने वाले श्रीरूख्खड़ स्वामी मंदिर परिसर में आज मंगलवार से श्री रूख्खड़ स्वामी महोत्सव 2026 का शुभारंभ होने जा रहा है। यह वही तपोभूमि है जहाँ परम तपस्वी संत श्री रूख्खड़नाथ स्वामी जी ने वर्षों तक कठोर साधना कर सनातन धर्म की अलख जगाई। इस महोत्सव को क्षेत्र की धार्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
तपोभूमि की ऐतिहासिक पहचान
मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ और माँ नर्मदा के अनन्य भक्त संत श्री रूख्खड़नाथ स्वामी जी ने यहाँ कठोर तपस्या कर क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत किया। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा को विशेष चमत्कारी माना जाता है। वहीं विश्व में विरल रूप से विराजित भस्म स्वरूप शिव पीठ इस स्थल को अद्वितीय धार्मिक पहचान प्रदान करता है। वर्षों से यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था, साधना और सेवा का केंद्र रहा है।

कलश यात्रा से होगा शुभारंभ
मंगलवार सुबह 10 बजे कलश यात्रा के साथ महोत्सव का विधिवत शुभारंभ होगा। इसके पश्चात सुबह 11 बजे लोकर्पण एवं समाकक्ष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसी क्रम में खैरा से खैरागढ़ तक विशाल बाइक रैली निकाली जाएगी, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भगवा ध्वज के साथ शामिल होकर धर्म और संस्कारों का संदेश देंगे।

दिनभर होंगे वैदिक अनुष्ठान
दोपहर में ध्वज पूजन, भूमि पूजन, वेदी स्थापना एवं पूजन संपन्न होंगे। गोधूलि बेला में गो पूजन का आयोजन श्री रूख्खड़ स्वामी गो सेवा विहार में किया जाएगा। शाम 5 बजे मंदिर परिसर में दिव्य हनुमंत अभिषेक एवं सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

धर्म, साधना और सेवा का संकल्प
उपाध्याक्ष भागवत शरण सिंह के अनुसार यह महोत्सव धर्म, साधना, सेवा और जन-जागरण के मूल भाव के साथ आयोजित किया जा रहा है। महामंडलेश्वर श्री कान्हाजी महाराज एवं श्री देवा जी महाराज के पावन मार्गदर्शन में विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे।
आध्यत्मिक आयोजन के बने साक्षी
ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष रामकुमार सिंह ने बताया कि महोत्सव के पहले ही दिन से खैरागढ़ क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बनने की संभावना है। आयोजक समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन के साक्षी बनें।
