अस्पताल की लापरवाही: मरीजों के लिए नहीं बेड और ईसीजी कॉर्नर पर सोया मिला कुत्ता

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सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। डायरिया के बढ़ते प्रकोप के बीच जिला मुख्यालय स्थित सिविल अस्पताल की अव्यवस्था ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। हालात इतने गंभीर हैं कि अस्पताल में भर्ती होने पहुंचे मरीजों को बेड नसीब नहीं हो रहा लेकिन उसी अस्पताल के ईसीजी कॉर्नर पर एक लावारिस कुत्ता तकिए पर सिर रखकर आराम फरमाता मिला। यह दृश्य न केवल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े करता है।

सूत्रों के अनुसार जिला स्तरीय सिविल अस्पताल में वर्तमान में महज़ सात नर्सों के भरोसे पूरा संचालन किया जा रहा है। न तो पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध है और न ही सुरक्षा व्यवस्था। नतीजा यह है कि जहां गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को बिस्तर और सुविधा नहीं मिल पा रही वहीं अस्पताल परिसर में आवारा जानवर तक आराम कर रहे हैं जिन्हें कोई रोकने टोकने वाला तक नहीं है। स्थानीय नागरिकों ने अस्पताल प्रबंधन की इस स्थिति को “बेहद शर्मनाक” करार दिया है। उनका कहना है कि डायरिया जैसे संक्रमणकाल में स्वास्थ्य सेवाओं की ऐसी बदइंतजामी आमजन के जीवन से खिलवाड़ है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी भी चिंताजनक है। ऐसे समय में जब संक्रमण तेजी से फैल रहा है अस्पताल में मानव संसाधन और सुरक्षा व्यवस्था की कमी सीधे तौर पर मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है और ऐसे में साय-साय मरीज का उपचार और उनकी सुरक्षा कैसे हो पाएगी। शासन और प्रशासन के लिए बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिला अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ और सुविधाएं क्यों नहीं हैं?
सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में मरीजों और परिजनों की जिम्मेदारी किसकी है? संक्रमणकाल में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां क्यों नाकाम साबित हो रही हैं?
ऐसे में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अस्पताल की व्यवस्था सुधारने और अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की मांग की है।

जानिए क्या है सिविल जिला अस्पताल की हकीकत

गंभीर मरीजों को नहीं मिल रहे बेड

ईसीजी कॉर्नर पर तकिए पर सोता मिला कुत्ता

महज़ 7 नर्सों के भरोसे पूरा संचालन

सुरक्षा कर्मियों की कोई तैनाती नहीं

डायरिया संक्रमण के बीच बढ़ा खतरा

शासन-प्रशासन से सीधे सवाल

पर्याप्त स्टाफ और संसाधन क्यों उपलब्ध नहीं?

संक्रमणकाल में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां नाकाम क्यों?

मरीजों और परिजनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

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