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स्वच्छ भारत मिशन की आड़ में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायतों में पारदर्शिता और स्वच्छता के दावों के बीच जनपद पंचायत छुईखदान में गार्बेज ट्राइसायकिल खरीदी को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। एक के बाद एक हो रही खरीदी ने न सिर्फ पंचायत प्रतिनिधियों को हैरान किया है बल्कि पंचायत निधि के दुरुपयोग की आशंका भी गहराती जा रही है।

जानकारी अनुसार पहले चरण में 75 गार्बेज ट्राइसायकिल की सप्लाई की गई थी जिसकी गुणवत्ता और कीमत को लेकर तब भी आपत्तियां उठी थी। अब 25 ग्राम पंचायतों के लिए 59 गार्बेज ट्राइसायकिल की सप्लाई का ऑर्डर जारी किया गया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पिछली खरीदी में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण वही प्रक्रिया दोहराई जा रही है।

स्थानीय बाजार में लगभग 22 हजार रुपये में उपलब्ध गार्बेज ट्राइसायकिल को जेम पोर्टल के माध्यम से 44 हजार से 50 हजार रुपये तक में खरीदे जाने का आरोप है। सप्लाई के बाद जब पंचायतों को वास्तविक कीमत की जानकारी मिली तो सरपंचों में नाराजगी देखने को मिली। यह अंतर केवल कीमत का नहीं बल्कि पंचायत फंड के संभावित दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

सूत्रों के मुताबिक पंचायतों की जेम आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि सचिवों और सरपंचों पर दबाव बनाकर ओटीपी हासिल किए जाते हैं और फिर तय फर्म से ऑर्डर प्लेस कर दिया जाता है। इस पूरे सिस्टम में कमीशन तय होने की भी चर्चा है वहीं कई सरपंचों का कहना है कि उन्हें न तो खरीदी प्रक्रिया की जानकारी दी गई और न ही कीमत बताई गई ट्राइसायकिल पंचायत में पहुंचने के बाद ही उन्हें पता चला कि किस फर्म से और किस दर पर खरीदी हुई है जो नियमों और पारदर्शिता के विपरीत है।

देवरचा पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि भुवन नेताम ने बताया कि उनके कार्यकाल में पंचायत में दो गार्बेज ट्राइसायकिल पहुंची लेकिन पंचायत ने न तो खरीदी की और न ही भुगतान से जुड़ी कोई प्रक्रिया की ट्राइसायकिल जनपद पंचायत के कर्मचारियों द्वारा लाकर छोड़ी गई। पंचायत के पास बिल या भुगतान से संबंधित कोई जानकारी नहीं है।

खुड़मुड़ी पंचायत के सरपंच ने बताया कि उनके गांव में अभी तक ट्राइसायकिल की सप्लाई नहीं हुई है और खरीदी प्रक्रिया की कोई स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई वहीं मैन्हर पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि का कहना है कि उनसे दस्तावेज जरूर मांगे गए लेकिन किस फर्म से और किस माध्यम से खरीदी हो रही है यह नहीं बताया गया। मामले में जनपद पंचायत का पक्ष रखते हुये छुईखदान की सीईओ केश्वरी देवांगन ने कहा कि वे हाल ही में पदभार ग्रहण कर के आई हैं। गार्बेज ट्राइसायकिल की प्रक्रिया उनके कार्यभार संभालने से पहले की है। पूरे मामले की जानकारी लेकर तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रत्येक ग्राम पंचायत एक स्वतंत्र एजेंसी है तो लगभग सभी पंचायतों में एक ही फर्म से ट्राइसायकिल की खरीदी कैसे हुई? जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पंचायतों को केवल नाम की एजेंसी बनाकर जेम पोर्टल के नियमों को दरकिनार किया गया और एक तय फर्म को लाभ पहुंचाया गया।

Satyamev News

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