श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में युवा किसानों का प्रदर्शन, 150 बाइक से कलेक्टर कार्यालय पहुंचे करीब 300 युवा

जिला मुख्यालय के पत्रकारों के साथ वार्ता में युवाओं ने कहा कि वे क्षेत्र में उद्योग और रोजगार के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना था कि क्षेत्र की कृषि क्षमता को देखते हुए टमाटर, चना और अन्य कृषि उपज आधारित प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। युवाओं ने कहा कि जिस जमीन पर कई पीढ़ियों से खेती कर परिवारों की आजीविका चल रही है उसे प्रभावित कर रोजगार पैदा करना विकास का उचित विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिनमें किसान की जमीन सुरक्षित रहे और किसान तथा युवा दोनों को आर्थिक लाभ मिले। उनका स्पष्ट संदेश था कि “रोजगार चाहिए लेकिन किसानों की कई पीढ़ियों की जमीन की कीमत पर नहीं।”

आंदोलन की आगामी रणनीति पर युवाओं ने कहा कि उनका संघर्ष केवल ज्ञापन सौंपने तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि परियोजना को लेकर क्षेत्र में दोबारा जनसुनवाई कराने का प्रयास किया गया तो किसान और युवा लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध करेंगे। युवाओं ने कहा कि किसानों की आपत्तियों और आशंकाओं को नजरअंदाज कर किसी भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कंपनी की मौजूदा गतिविधियों को लेकर पूछे गए सवाल पर युवाओं ने कहा कि फिलहाल क्षेत्र में कोई बड़ी गतिविधि दिखाई नहीं दे रही है लेकिन कंपनी से जुड़े लोगों की आवाजाही बढ़ने की जानकारी मिल रही है। इसलिए ग्रामीण लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

वार्ता में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी युवाओं ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जनता ने जिन प्रतिनिधियों को चुनकर सदन तक पहुंचाया है उनसे किसानों को उम्मीद थी कि वे जमीन, खेती, पानी और पर्यावरण से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनके साथ खड़े होंगे। युवाओं ने कहा कि यदि कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि किसानों की मांगों के साथ खड़ा नहीं होता या परियोजना के पक्ष में दिखाई देता है तो यह क्षेत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जनता जनप्रतिनिधियों के रुख को ध्यान में रखेगी और भविष्य में उनके निर्णय का मूल्यांकन करेगी।

युवा किसानों ने कहा कि उद्योग और रोजगार क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी हैं लेकिन विकास की कीमत किसानों की जमीन, जलस्रोत और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी परियोजना पर अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रभावित गांवों के किसानों और परिवारों की आजीविका तथा भविष्य को ध्यान में रखा जाए। युवाओं ने किसान अधिकार संघर्ष समिति के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि वे आगे भी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे और प्रभावित गांवों के लोगों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
परियोजना को लेकर युवाओं ने जताई गंभीर चिंता
प्रेस वार्ता के दौरान कुछ युवाओं ने परियोजना के संभावित प्रभावों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में खनन और सीमेंट फैक्ट्री शुरू होती है तो खेती, जमीन, पानी और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। युवाओं ने कहा कि वे अपनी जमीन और भविष्य को प्रभावित होते नहीं देख सकते। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि परियोजना से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का गंभीरता से आकलन किया जाए। युवाओं ने कहा कि उनका संघर्ष शांतिपूर्ण है, लेकिन जमीन, खेती और पर्यावरण की सुरक्षा के सवाल पर वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। प्रेसवार्ता और प्रदर्शन के दौरान विक्रम सिंह यादव, सौरभ जंघेल, बबलू, हुकूम, वीरेंद्र जंघेल, ज्ञानेंद्र जंघेल, वेदप्रकाश, चिरंजीव जंघेल सहित बड़ी संख्या में युवा किसान एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे। युवाओं ने दोहराया कि “उद्योग और रोजगार जरूरी हैं लेकिन किसान की जमीन, पानी, पर्यावरण और छत्तीसगढ़ महतारी की धरती की कीमत पर नहीं।”

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