
शिक्षा सचिव से ‘ब्रेक इन सर्विस’ की मांग
डीईओ बोले- विकल्प मिलने पर ही करेंगे कार्यमुक्त
कलेक्टर से डीईओ कार्यालय तक चर्चा तेज
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। शासन के संलग्नीकरण समाप्ति आदेश के बाद भी एक व्याख्याता को मूल पदस्थापना के लिए कार्यमुक्त नहीं किए जाने का मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। छुईखदान निवासी बी.आर. यादव ने शिक्षा सचिव को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि लोक शिक्षण संचालनालय के 14 जुलाई 2026 के आदेश के बावजूद शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला चिचोला के व्याख्याता (एल.बी.) आत्माराम साहू अब भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न हैं। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, संचालक लोक शिक्षण, कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को भी भेजी गई है। मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत के बाद यह विषय कलेक्टर कार्यालय से लेकर डीईओ कार्यालय तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
‘ब्रेक इन सर्विस’ की मांग, शासन के निर्देशों की अवहेलना का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रदेशभर में शासन के निर्देशों के अनुरूप संलग्न शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर भेजा जा चुका है, लेकिन इस मामले में अब तक कार्रवाई नहीं हुई। आवेदन में शिक्षा सचिव से मांग की गई है कि संबंधित व्याख्याता को तत्काल मूल संस्था में कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए जाएं तथा आदेश जारी होने के बाद से अब तक की अवधि को नियमानुसार ‘ब्रेक इन सर्विस’ मानते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होना छात्रहित और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है।
समग्र शिक्षा का अलग विभाग, रिक्त पदों से बनी स्थिति
जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल साव ने बताया कि संबंधित व्याख्याता वर्तमान में समग्र शिक्षा से जुड़े कार्य देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा, लोक शिक्षण संचालनालय से अलग विभाग है और उसका अलग संचालक एवं प्रशासनिक ढांचा है। जिले में समग्र शिक्षा के डीएमसी, एपीसी और एडीपीओ के तीनों पद फिलहाल रिक्त हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था होने पर होगी कार्यमुक्ति
डीईओ ने बताया कि इस संबंध में समग्र शिक्षा के संचालक को सूचना भेजी जा चुकी है। जैसे ही वैकल्पिक अधिकारी या कर्मचारी की व्यवस्था होगी, संबंधित व्याख्याता को मूल संस्था के लिए कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला गठन के समय प्रशासनिक आवश्यकता के कारण उन्हें इस कार्य के लिए रखा गया था और वे पिछले करीब तीन वर्षों से यही जिम्मेदारी निभा रहे हैं। हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि शासन का आदेश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी भी कर्मचारी को अपवाद बनाकर कार्यालय में बनाए रखना आदेश की भावना के विपरीत है।