वन अमले की तैनाती के बावजूद सागौन की लकड़ी से फर्नीचर निर्माण का मामला आया सामने, निगरानी पर उठे सवाल

खैरागढ़। क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी व्यवस्था के बावजूद सागौन की लकड़ी से फर्नीचर निर्माण का मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। नवागांव कंवर निवासी राम गोड के यहां सागौन की लकड़ी से फर्नीचर बनाए जाने का मामला सामने आया है। इससे संबंधित वीडियो फुटेज भी सामने आया है जो सोशल मिडिया में वायरल हो रहा है। दूसरी ओर पूछताछ के दौरान राम गोड ने लकड़ी के उपयोग के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं होने की बात कही। ऐसे में लकड़ी कहां से लाई गई और उसकी वैधता क्या है, इसकी जांच आवश्यक हो गई है। बहरहाल बात करें तो वन विभाग द्वारा जंगलों की सुरक्षा और अवैध कटाई पर रोक लगाने के लिए बीट स्तर पर वनरक्षकों की तैनाती की जाती है। इसके अलावा वनपाल और वन परिक्षेत्र अधिकारी भी अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी एवं वन संरक्षण की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद सागौन जैसी इमारती लकड़ी से फर्नीचर निर्माण का मामला सामने आना विभागीय गश्त और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल उठ रहा है कि संबंधित लकड़ी जंगल से अवैध रूप से काटकर लाई गई है तो यह जांच का विषय है कि कटाई किस स्थान पर हुई और वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल सकी। हालांकि लकड़ी के स्रोत और उसकी वैधता की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो पायेगी।

मामले की जानकारी वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) को दी गई है। डीएफओ संजय यादव ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब वन विभाग की ओर से मौके पर जांच कर लकड़ी के स्रोत, उसके परिवहन और उपयोग की वैधता की पड़ताल किया जाना जरूरी है। जांच में यदि अवैध कटाई या वन नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्षेत्र में तैनात वन अमले को इस गतिविधि की जानकारी थी या नहीं।

मामले में वन विभाग का पक्ष जानने के लिए वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) सुश्री सिमरन साहू से पत्रकार प्रतिनिधियों द्वारा मोबाईल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके चलते खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया है।

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