
राजपरिवार से जुड़ा SIR विवाद तीन चरणों बाद पहुंचा सुनवाई तक

विभा सिंह ने वीडियो जारी कर रखा अपना पक्ष और उठाए सवाल
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठा विवाद अब स्पष्ट रूप से तीन चरणों में सामने आ चुका है। पहले लिखित शिकायत फिर जिला प्रशासन का आधिकारिक खंडन और अब तहसील स्तर पर औपचारिक सुनवाई। इस पूरे घटनाक्रम ने खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़े पुराने विवाद को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से केंद्र में ला दिया है।
शिकायत से शुरू हुआ मामला न्यायलय तक पहुंचा
मामले की शुरुआत 30 दिसंबर 2025 को हुई जब रानी विभा सिंह ने कलेक्टर कार्यालय खैरागढ़ में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि SIR प्रक्रिया के दौरान दिवंगत पूर्व विधायक एवं सांसद राजा देवव्रत सिंह की वैवाहिक स्थिति को लेकर गंभीर त्रुटि की गई है। मामले में रानी विभा सिंह का कहना है कि स्व.राजा देवव्रत सिंह की तलाकशुदा पूर्व पत्नी पद्मा सिंह जो वर्तमान में नितिन पंत की पत्नी हैं उन्हें फिर से राजा देवव्रत सिंह की पत्नी के रूप में मतदाता सूची में दर्ज कर दिया गया जबकि तलाक के बाद राजा देवव्रत सिंह का विवाह रानी विभा सिंह से हुआ था।

प्रशासन ने खंडन कर SIR प्रक्रिया को बताया था पारदर्शी
शिकायत के बाद 1 जनवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय खैरागढ़ की ओर से एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी इसमें SIR प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार पूरी तरह पारदर्शी ढंग से किया जा रहा है। विज्ञप्ति में बताया गया था कि वर्ष 2003 और 2025 की मतदाता सूचियों का परस्पर मिलान कर 23 दिसंबर 2025 को प्रारंभिक सूची प्रकाशित की गई है। इसी आधार पर एकीकृत मतदाता सूची तैयार की गई है।

आपत्ति के लिये 23 दिसंबर से 22 जनवरी तक का दिया गया है अवसर
कलेक्टर कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रविष्टि पर आपत्ति है तो 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 के बीच निर्धारित प्रारूप में दस्तावेजी साक्ष्य सहित दावा-आपत्ति प्रस्तुत की जा सकती है। इसके बाद निर्वाचन नियम 1960 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
राजपरिवार के SIR विवाद की तहसील स्तर पर होगी सुनवाई
प्रशासनिक खंडन के बावजूद मामला यहीं नहीं थमा। 5 जनवरी 2026 को तहसीलदार छुईखदान ने इस प्रकरण में नोटिस जारी कर दोनों पक्षों को 14 जनवरी 2026 को समस्त दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए इसके बाद स्पष्ट हो गया कि अब यह मामला औपचारिक रूप से प्रशासनिक सुनवाई के चरण में प्रवेश कर चुका है।
खैरागढ़ राजपरिवार का विवाद फिर सतह पर
राजा देवव्रत सिंह के निधन के बाद से चला आ रहा खैरागढ़ राजपरिवार का मतभेद लगातार सार्वजनिक होता रहा है। ज्ञात हो कि राजा देवव्रत सिंह के निधन के बाद से ही उनकी पत्नी रानी विभा सिंह और पूर्व पत्नी पद्मा सिंह के बीच दस्तावेजों और अधिकारों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। अब मतदाता सूची में हुई इस कथित त्रुटि ने उस पारिवारिक विवाद को चुनावी और प्रशासनिक प्रक्रिया से जोड़ दिया है।
जानिए वीडियो जारी कर रानी विभा सिंह ने क्या कहा?
गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई हो इस बात को जोर देते हुये मामले को लेकर रानी विभा सिंह ने एक वीडियो जारी कर कहा कि पद्मा पंत नाम की महिला ने मेरे पति स्वर्गीय देवव्रत सिंह का नाम अपने पति के रूप में लिख रखा है और हमारे घर का पता भी उपयोग कर रही हैं। इसी को लेकर मैंने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद प्रशासन और न्यायालय ने पद्मा पंत को नोटिस जारी किया है कि उन्होंने किस आधार पर मेरे पति का नाम उपयोग किया है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें भी नोटिस प्राप्त हुआ है और वे 14 जनवरी को छुईखदान तहसील कार्यालय में सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होंगी। विभा ने वीडियो संदेश में आगे कहा है कि- मैं चाहती हूं कि पद्मा पंत भी न्यायालय में उपस्थित होकर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करें। मुझे पूरा विश्वास है कि प्रशासन और न्यायालय SIR प्रक्रिया में गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई करेगा और मुझे न्याय मिलेगा।
नजरें 14 जनवरी पर, दस्तावेज तय करेंगे अगला कदम
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि SIR प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है वहीं 14 जनवरी की सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि मामला केवल दावा-आपत्ति प्रक्रिया का हिस्सा है या वास्तव में किसी स्तर पर गंभीर चूक हुई है। इस बीच पूरे जिले और देशभर में राज परिवार से जुड़े लोगों की नजरें अब तहसील स्तर की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है। बहरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी 14 जनवरी को छुई खदान तहसील न्यायालय में दस्तावेजों के प्रस्तुतीकरण और सुनवाई के बाद क्या निर्णय निकाल कर सामने आएगा।