भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा श्रीयंत्र प्रसाद भवन- विधायक हर्षिता स्वामी ने निरीक्षण के बाद लगाये आरोप

सत्यमेव न्यूज ठेलकाडीह। राज्य व केंद्र सरकार की संयुक्त योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित हो रहा श्रीयंत्र प्रसाद योजना का भवन अब अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। श्रद्धालुओं और आम जनता की सुविधा के लिए बनाया जा रहा यह भवन निर्माण पूर्ण होने से पहले ही जर्जर हालत में पहुंच गया है जिसने गुणवत्ता, पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रविवार को डोंगरगढ़ विधानसभा की कांग्रेस विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ श्रीयंत्र प्रसाद भवन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई कमरों की दीवारों में दरारें, स्लैब में क्रैक, सीपेज की समस्या और जगह-जगह से उखड़ा प्लास्टर साफ नजर आया। यह स्थिति भवन के अधूरे रहते ही सामने आना निर्माण में गंभीर लापरवाही और घटिया सामग्री के उपयोग की ओर इशारा करती है।

विधायक श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल के निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भवन का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है इसके बावजूद मरम्मत कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। यह न केवल तकनीकी नियमों का उल्लंघन प्रतीत होता है बल्कि सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की भी आशंका पैदा करता है।

जानकारी अनुसार परियोजना के लिए न तो किसी विधिवत निर्माण निगरानी समिति का गठन किया गया और न ही कार्य की नियमित तकनीकी समीक्षा हुई। निर्माण कार्य की शुरुआत और पूर्णता की कोई स्पष्ट समय सीमा भी तय नहीं की गई जिससे पूरे प्रोजेक्ट की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गया है। लंबे समय से सुस्त या बंद पड़ा निर्माण कार्य भवन के भीतर चमगादड़ों का पाया जाना इस बात का संकेत है कि निर्माण कार्य लंबे समय से या तो ठप है या बेहद धीमी गति से चल रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता दर्शा रही है बल्कि जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ भी मानी जा रही है।

विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि निर्माण पूरा होने से पहले ही भवन का जर्जर होना भ्रष्टाचार और लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है। दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। मामले को लेकर शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा। जिस भवन को विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा का प्रतीक बनना था वही आज कथित भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का उदाहरण बनता जा रहा है। बहरहाल जनहित में सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह भवन भी फाइलों और दरारों में ही सिमटकर रह जाएगा?

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