बिजेतला के गौठान से सरकारी लोहे के एंगल चोरी, पंचायत की भूमिका संदेहास्पद थाने में शिकायत नहीं

पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जालबांधा। समीपस्थ ग्राम पंचायत विजेतला के गौठान से सुरक्षा घेरा बनाने के लिए लगाए गए करीब 35 से 40 लोहे के एंगल चोरी होने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी के बावजूद अब तक पुलिस थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराए जाने को लेकर ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। गांव के पूर्व सरपंच नारद वर्मा ने मामले को गंभीर बताते हुए चोरी गए सामान की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। पूर्व सरपंच नारद वर्मा के अनुसार गौठान में लगाए गए लोहे के एंगल ग्राम पंचायत की संपत्ति हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में एंगल चोरी होने के बावजूद पुलिस को सूचना नहीं देना चिंताजनक है। उन्होंने पंचायत के जिम्मेदार लोगों से मामले की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराने की बात कही थी। उनका आरोप है कि इस पर कथित तौर पर सरपंच पति की ओर से यह जवाब दिया गया कि जब चोर की जानकारी ही नहीं है, तो रिपोर्ट दर्ज कराने का क्या औचित्य है।
चोर की पहचान न होना शिकायत नहीं करने का आधार नहीं
नारद वर्मा का कहना है कि चोरी की घटना की शिकायत दर्ज कराने के लिए आरोपी की पहचान होना जरूरी नहीं है। यदि पंचायत की संपत्ति चोरी हुई है तो इसकी सूचना पुलिस को देकर जांच की मांग की जानी चाहिए। पुलिस जांच के माध्यम से चोरी गए सामान और घटना में शामिल लोगों का पता लगाने का प्रयास कर सकती है। ऐसे में शिकायत दर्ज नहीं कराए जाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पंचायत के कामकाज में सरपंच पति की भूमिका पर भी सवाल

इस मामले के बीच ग्राम पंचायत के कामकाज में सरपंच पति की कथित भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठाया जा रहा है कि निर्वाचित महिला सरपंच के रहते पंचायत के कार्यों में उनके पति की भूमिका किस सीमा तक है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है। पूर्व सरपंच नारद वर्मा ने गौठान से चोरी हुए 35 से 40 लोहे के एंगल के मामले की जांच कराने, पंचायत की संपत्ति का पता लगाने और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है साथ ही पंचायत की सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। अब देखना यह है कि ग्राम पंचायत इस मामले में पुलिस को शिकायत देकर जांच की पहल करती है या नहीं। मामले में पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

