
किसानों ने ठगा महसूस कर किया परियोजना का विरोध
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले के महत्वपूर्ण क्षेत्र जालबांधा से लगे ग्राम विजेतला में वर्ष 2016-17 में औद्योगिक प्रयोजन के लिए फूड प्रोसेसिंग पार्क स्थापित करने के नाम पर किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय राज्य में भाजपा की सरकार थी और बाबा रामदेव की कंपनी के फूड प्रोसेसिंग पार्क के लिए किसानों से भूमि ली गई थी। किसानों को उस दौरान सिंचित भूमि के लिए 10 लाख रुपये प्रति एकड़, असिंचित भूमि के लिए 8 लाख रुपये प्रति एकड़ और पड़त भूमि के लिए 6 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया गया था। बाद में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कोरोना महामारी के चलते प्रस्तावित फूड पार्क की योजना पर कोई ठोस काम नहीं हो सका। इस दौरान किसान अपनी पूर्व भूमि पर खेती कर जीवन यापन करते रहे। अब राज्य में फिर से भाजपा सरकार आने के बाद उसी भूमि पर फूड प्रोसेसिंग पार्क की जगह गेल कंपनी द्वारा यूरिया प्लांट स्थापित किए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसे लेकर क्षेत्र में विवाद गहरा गया है। किसानों का आरोप है कि फूड पार्क के नाम पर जमीन लेकर अब दूसरी परियोजना लगाई जा रही है जिससे वे अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उस समय जिन किसानों ने अपनी जमीन 10 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से दी थी वे अब खुद को नुकसान में मान रहे हैं क्योंकि जिन किसानों ने उस समय जमीन नहीं दी थी उनकी भूमि वर्तमान में लगभग 50 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से खरीदी जा रही है। इससे किसानों में असंतोष और नाराजगी बढ़ गई है। इस मुद्दे को लेकर प्रभावित किसानों ने विरोध दर्ज कराते हुए डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल के साथ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। किसानों ने मांग की है कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए और परियोजना से जुड़े फैसलों पर पुनर्विचार किया जाए। इधर स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि यूरिया प्लांट के लिए सड़क निर्माण के नाम पर आसपास के गांवों से मुरूम का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा बिना अनुमति के खनन किया जा रहा है जिससे पर्यावरण और ग्रामीणों की जमीन को नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं जमीन और परियोजना को लेकर क्षेत्र में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है।
