पांड़ादाह के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो जुड़वा बच्चों ने लिया जन्म, सुरक्षित और सामान्य प्रसव से गाँव में हर्ष

35 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंची प्रसूता
स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने कराया सामान्य प्रसव
खैरागढ़। छुईखदान ब्लॉक के वनांचल ग्राम जुरलाखार की निवासी शकुंतला बाई ने प्रसव पीड़ा के बावजूद लगभग 35 किलोमीटर का सफर तय कर पांडादाह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता, अनुभव और सूझबूझ से महिला का सुरक्षित सामान्य प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद मां और दोनों नवजात स्वस्थ हैं तथा स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में हैं। जानकारी अनुसार सोमवार को प्रसव पीड़ा से परेशान शकुंतला बाई को बेहतर उपचार के लिए पांडादाह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। यहां पदस्थ चिकित्सक डॉ.रितुराज सिंह, नर्स कुमेश्वरी ठाकुर और अंजली डेनियल ने तत्काल प्रसव की जिम्मेदारी संभाली। स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी दक्षता और अनुभव का परिचय देते हुए महिला का सफलतापूर्वक सामान्य प्रसव कराया। इस दौरान महिला ने दो स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया।
सालाना 350 से अधिक महिलाओं का होता है प्रसव
पांडादाह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां प्रतिवर्ष 350 से अधिक महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। चिकित्सा अधिकारी डॉ.रितुराज सिंह के अनुसार केंद्र में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी अनुभवी हैं और प्रसव के दौरान पूरी गंभीरता तथा जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं देते हैं।
वनांचल के कई गांवों के लिए भरोसेमंद केंद्र बना पांडादाह का सरकारी अस्पताल
पांडादाह का सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के लिए भरोसे का अस्पताल बन गया है। इस केंद्र के अंतर्गत गातापार जंगल, ईटार, चंगुर्दा और लक्षणा सहित लगभग 50 से अधिक गांव आते हैं। इसके अलावा जुरलाखार, भावे और बकरकट्टा जैसे वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीण भी बेहतर उपचार और प्रसव सेवाओं के लिए इसी केंद्र पर निर्भर रहते हैं।दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से यह केंद्र ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। सीमित समय में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना यहां के स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। जुड़वा बच्चों का जन्म होने के बाद मां और दोनों नवजातों का स्वस्थ होना परिवार के लिए राहत की बात है। स्वास्थ्यकर्मियों की सतर्कता और समय पर मिली चिकित्सा सहायता से प्रसव सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ।

