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खैरागढ़ के करमतरा स्कूल में रतनजोत के बीज खाने से 17 बच्चे बीमार

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। जिले के करमतरा गांव स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब प्रार्थना सभा के दौरान एक-एक कर बच्चे चक्कर खाकर जमीन पर गिरने लगे और इसके बाद कुछ ही मिनटों में स्कूल का शांत वातावरण अफरा-तफरी और दहशत में बदल गया। शिक्षक भी कुछ देर तक यह समझ ही नहीं पाए कि बच्चों के साथ आखिर हो क्या रहा है।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार स्कूल खुलने से पहले पहुंचे कुछ बच्चों ने विद्यालय परिसर और आसपास उगे रतनजोत के जहरीले पौधे का फल खा लिया था। जहरीले बीजों के खतरनाक असर से अनजान बच्चों ने इसे सामान्य फल समझकर खा लिया जिसका प्रभाव प्रार्थना सभा के दौरान अचानक सामने आया। इस घटना में 16 से 17 बच्चे बीमार पड़ गए। हालत बिगड़ते देख स्कूल प्रबंधन ने तत्काल सभी बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जालबांधा पहुंचाया जहां एक की हालत गंभीर बताई गई है। बताया गया कि 4 बच्चों पर रतनजोत के ज़हर का असर अधिक पाया गया है। एक बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर उसे खैरागढ़ रेफर किया गया। शेष बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है
अस्पताल में डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी और उपचार में जुटी रही।

घटना की खबर फैलते ही करमतरा गांव में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में अभिभावक और ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए। अस्पताल परिसर में अपने बच्चों को लेकर माता-पिता की आंखों में डर और चिंता साफ देखी गई। इस दौरान सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि शिक्षा विभाग पूरे मामले से अनजान रहा। इस गंभीर घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिले के जिम्मेदार शिक्षा विभाग के आला अधिकारी ही पूरे मामले से अनजान नजर आए। स्कूल परिसर में जहरीले पौधों की मौजूदगी और सुरक्षा उपायों की अनदेखी ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर प्रभावित अभिभावकों की मांग है कि इस मामले में जांच और कार्रवाई जरूरी है। घटना के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल परिसर व आसपास से सभी जहरीले पौधों को तत्काल हटाने लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। बहरहाल एक छोटी लापरवाही की वजह से नन्हे छात्रों के लिए बड़ा खतरा बढ़ गया। एक छोटी-सी अनदेखी ने मासूम बच्चों की जान को गंभीर जोखिम में डाल दिया। यह घटना न सिर्फ स्कूल सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि शिक्षा विभाग की सजगता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

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