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नाट्य महोत्सव में दूसरे दिन विविध विषयों पर आधारित नाटकों ने बांधा समां

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में आयोजित नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत नाटकों ने दर्शकों को गहन संवेदनात्मक अनुभव कराया। मंचित नाटकों में सामाजिक मनोवैज्ञानिक और पारिवारिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व प्रसिद्ध नाटककार हेनरिक इब्सन की रचना ए डॉल्स हाउस से हुआ जिसका निर्देशन अमित कुमार पटेल ने किया। अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत इस नाटक में 19वीं शताब्दी की महिला नोरा हेल्मर के जीवन संघर्ष को दर्शाया गया। कहानी में दिखाया गया कि किस प्रकार सामाजिक प्रतिष्ठा और पारंपरिक मान्यताओं के दबाव में एक महिला अपनी पहचान खो बैठती है लेकिन अंततः आत्मसम्मान और स्वतंत्र जीवन की राह चुनती है। नाटक ने नारी स्वाभिमान सामाजिक ढांचे और वैवाहिक संबंधों में समानता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उभारा।

इसके बाद अख्तर अली द्वारा रचित असमंजस बाबू का मंचन हुआ जिसका निर्देशन डॉ. शिशु कुमार सिंह ने किया। नाटक में व्यक्ति के भीतर चलने वाले मानसिक संघर्ष निर्णय लेने की जटिलता और सामाजिक अपेक्षाओं के दबाव को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि आधुनिक जीवन में व्यक्ति किस तरह अनेक द्वंद्वों से गुजरता है। द्वितीय दिवस की अंतिम प्रस्तुति वो फिर आएगी नाटक रही जो रूसी साहित्यकार एंटोन चेखव की रचना का हिंदी रूपांतरण है। इस प्रस्तुति को भी दर्शकों ने सराहा और कलाकारों के अभिनय को भरपूर तालियां मिलीं। कार्यक्रम के दौरान अधिष्ठाता डॉ. मानस साहू, सहायक प्राध्यापक कौस्तुभ रंजन, अतिथि व्याख्याता डॉ. प्रमोद पांडेय सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

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