अपराध

छुईखदान तहसील परिसर में सामने आ रहे मनमानी के आरोप

सत्यमेव न्यूज छुईखदान। नगर के तहसील कार्यालय परिसर में आवेदन लिखने का कार्य करने वाले कुछ लोगों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि यहां नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से काम किया जा रहा है और आम लोगों से निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूली जा रही है। जानकारी अनुसार जहां एक साधारण आवेदन लिखने का सामान्य शुल्क लगभग 50 रुपये होना चाहिए वहीं कुछ लोग इसके लिए 200 से 300 रुपये तक की मांग कर रहे हैं। दूर-दराज के गांवों से आने वाले ग्रामीण अपनी मजबूरी के कारण यह राशि देने को विवश हो जाते हैं। इससे लोगों में नाराजगी और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि एक ही लाइसेंस के नाम पर एक ही परिवार के दो से तीन सदस्य बैठकर आवेदन लिखने का काम कर रहे हैं जो नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि कई बार आवेदन सही तरीके से तैयार नहीं किए जाते। भाषा, तथ्य और प्रारूप में त्रुटियों के कारण कई आवेदन विभागों में स्वीकार नहीं किए जाते जिससे लोगों को बाद में व्यवहार न्यायालय जाकर वकीलों के माध्यम से दोबारा आवेदन तैयार करवाना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। कुछ नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि तहसील परिसर में काम करने वाले कुछ लोग काम के दौरान पान-गुटखा खाते हुए बैठते हैं और कई बार ग्राहकों से दुर्व्यवहार तथा अभद्र भाषा का प्रयोग भी करते हैं जिससे ग्रामीणों को असुविधा और अपमान का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यह भी आरोप सामने आया है कि उपयोग किए जाने वाले स्टाम्प पेपर पर पहले से ही किसी अधिवक्ता की सील और हस्ताक्षर लगे होते हैं जबकि नियमानुसार आवेदन तैयार होने के बाद ही अधिवक्ता द्वारा नोटरी सील और हस्ताक्षर किए जाने चाहिए। पहले से हस्ताक्षरित स्टाम्प पेपर के उपयोग को लेकर भी लोगों ने जांच की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील परिसर में छोटे-छोटे कार्यों के नाम पर भी अधिक राशि वसूली जा रही है जिससे गरीब और ग्रामीण जनता आर्थिक शोषण का शिकार हो रही है। नागरिकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा तहसील परिसर में काम करने वाले आवेदन लेखकों के लाइसेंस, शुल्क और कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग की है।

जानकर सूत्रों के आरोप के अनुसार तहसील परिसर में कई स्थानों पर एक ही लाइसेंस के नाम पर परिवार के दो से तीन लोग बैठकर आवेदन लिखने का कार्य कर रहे हैं। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।

कई मामलों में आवेदन पत्रों में भाषा और तथ्यात्मक त्रुटियां होने के कारण विभाग उन्हें स्वीकार नहीं करते। ऐसे में ग्रामीणों को व्यवहार न्यायालय जाकर वकीलों से दोबारा आवेदन तैयार करवाना पड़ता है जिससे उनका खर्च दोगुना हो जाता है।

कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में स्टाम्प पेपर पर पहले से ही किसी अधिवक्ता की सील और हस्ताक्षर लगे होते हैं। नियम के अनुसार आवेदन तैयार होने के बाद ही नोटरी सील और हस्ताक्षर किए जाने चाहिए।

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