
तीन साल में खर्च हो गए 70 लाख रूपये
समिति पर लग रहे अनियमितता के आरोप
बिना प्रस्ताव राशि उपयोग का मामला उजागर
खैरागढ़। विकासखंड के ग्राम अमलीडीह कला स्थित श्री गोपाल गोवर्धन गौशाला एक बार फिर विवादों में है। पशुधन विकास विभाग से पिछले तीन वर्षों में लगभग 70 लाख रुपये का अनुदान मिलने के बावजूद गौशाला की व्यवस्थाओं और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। समिति के भीतर अनुदान राशि के उपयोग को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं जिससे मामला और जटिल हो गया है।
अनुदान और वास्तविक स्थिति में अंतर
गौर करें कि गौशाला में रिकॉर्ड के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में 25 लाख, 2024-25 में 20 लाख तथा 2025-26 में 25 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। समिति के आंकड़ों में क्रमशः 500, 514 और 543 गौवंश दर्ज किए गए हैं हालांकि वर्तमान स्थिति में गौशाला में इतनी संख्या में गौवंश मौजूद नहीं दिख रहे हैं जिससे रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच अंतर की आशंका व्यक्त की जा रही है। ग्रामीणों और समिति के कुछ सदस्यों का आरोप है कि अनुदान के अनुरूप सुविधाएं विकसित नहीं हुई हैं।

बिना प्रस्ताव खर्च और बैठक प्रक्रिया पर भी सवाल
ग्राम सरपंच सहित कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि समिति के अध्यक्ष, सचिव और उपकोषाध्यक्ष पिछले कुछ वर्षों से मनमाने तरीके से कार्य कर रहे हैं। अन्य सदस्यों को न तो बैठकों की सूचना दी जाती है और न ही निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि 13 अगस्त 2023 के बाद आयोजित बैठकों में पूर्ण कोरम का अभाव रहा और सीमित सदस्यों द्वारा ही निर्णय लिए जाते रहे। बिना विधिवत प्रस्ताव के राशि निकासी और खर्च के आरोपों ने पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं।
पेड़ों की कटाई और लेखा अभिलेख में मिली विसंगति
जांच प्रतिवेदन में उल्लेख है कि गौशाला परिसर के कुछ पेड़ों को काटकर बेचा गया और उसके बदले ईंटें खरीदी गई हालांकि यह सामग्री स्थल पर पाई गई लेकिन इस लेन-देन का स्पष्ट उल्लेख कार्यवाही रजिस्टर में नहीं है जिससे वित्तीय अनियमितता की आशंका प्रबल होती है।
गौवंश देखरेख पर भी सवालिया निशान
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गौशाला में गौवंश को पर्याप्त चारा नहीं मिल रहा है और कई बार केवल एक समय ही भूसा दिया जाता है। इससे पशु देखरेख की स्थिति पर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार विवाद का मुख्य कारण अनुदान राशि का उपयोग और नियंत्रण है। समिति के भीतर दो गुट बन गए हैं। एक पक्ष वित्तीय पारदर्शिता की मांग कर रहा है जबकि दूसरा संचालन पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।

जानिए जांच के बाद की स्थिति
नोडल अधिकारी के निर्देश पर गठित जांच समिति ने सिफारिश की है कि भविष्य में सभी निर्णय पूर्ण कोरम के साथ बैठक में लिए जाएं और प्रत्येक व्यय का विधिवत अनुमोदन सुनिश्चित किया जाए। मामले को आगे की कार्रवाई हेतु उच्च स्तर पर भेजा जा रहा है। आगे प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। बता दे कि मामला अब जिला प्रशासन और गौसेवा आयोग के संज्ञान में पहुंच सकता है। यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदार पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई संभव है।
क्या है समिति अध्यक्ष का पक्ष
गौशाला समिति के अध्यक्ष आसाराम पटेल ने बताया कि वर्तमान में गौशाला में लगभग 400 से 500 गौवंश हैं हालांकि हाल में सटीक गणना नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि चारा खरीद के साथ दान के माध्यम से भी प्राप्त होता है। पिछले तीन वर्षों में प्राप्त लगभग 70 लाख रुपये का उपयोग संचालन, मजदूरी, चारा व्यवस्था तथा निर्माण कार्यों में किया गया है। उन्होंने करीब 15-16 लाख रुपये की लागत से हार्वेस्टर खरीदे जाने की भी जानकारी दी। पेड़ों की कटाई के बदले ईंट लेने की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने इसे आवश्यक बताया। समिति में विवाद के संबंध में उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य शुल्क न देने और निष्क्रिय रहने के कारण अलग हो गए हैं।

