खैरागढ़ विवि में संस्कृत दिवस पर विद्यार्थियों ने दी विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

खैरागढ़। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजन यादव ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। शोधार्थी अतुल त्रिपाठी ने वैदिक मंगलाचरण (स्वस्तिवाचन) प्रस्तुत किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना के माध्यम से मां सरस्वती की आराधना की। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया।कार्यक्रम में बीपीए तृतीय वर्ष के छात्र चिराग यादववंशी ऐश्वर्य योगी ने भरतनाट्यम शैली में नट-कौतुक नृत्य प्रस्तुत किया। बीपीए तृतीय वर्ष की छात्रा कुमारी खिलेश्वरी पटेल ने “चल-चल पुरतो निधेहि चरणम्” गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने नशामुक्ति पर आधारित “सज्जीवनी” नामक लघुनाटिका प्रस्तुत की। नाटिका में दिखाया गया कि कुसंगति के कारण अध्ययनशील विद्यार्थी भी दुर्व्यसन की ओर आकर्षित हो सकता है, जबकि सज्जीवनी शक्ति उसे दुर्व्यसन से मुक्त करती है। लघुनाटिका में दुर्व्यसन को प्रतीकात्मक पात्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसमें सोमदेव सिंह, आशीष हर्षवर्धन उपाध्याय, माता-दुर्गादेवी शर्मा, पिता-सत्यम शर्मा, आस्था-विधि पटेल, मित्र विशाल एवं महाविद्यालय के प्राचार्य-परमानंद गिरी सहित विद्यार्थियों ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं। लघुनाटिका का निर्देशन शोधार्थी कुशल सुधार ने किया, जबकि नाटिका के सूत्रधार अतुल त्रिपाठी रहे। नृत्य विभाग की शोध-छात्रा पूजा ने नटकी की भूमिका निभाई वहीं मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन की दृष्टि से एक शब्दचोटिका खेल भी आयोजित किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने चुटिका लेकर उसमें अंकित शब्द का अर्थ बताया। इसके पश्चात नटराज स्वरूप भगवान शिव के डमरू से अक्षरों की उत्पत्ति तथा माहेश्वर सूत्रों के माध्यम से कला एवं व्याकरण के समन्वय को दर्शाते हुए शोध छात्राओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया।संस्कृत दिवस की परंपरा के अनुरूप ग्रंथों का सूत्रबन्धन किया गया। विद्यार्थियों ने “कृत्वा नव दृढं संकल्पम्” संकल्प-गीत प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र में डॉ.देवमाइंट मिंज ने विद्यार्थियों की नाट्य एवं अन्य प्रस्तुतियों की सराहना की। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो.राजन यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत के छंदों का प्रयोग हिंदी साहित्य में भी व्यापक रूप से होता है। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। कार्यक्रम का समापन विभाग की सहायक प्राध्यापिका द्वारा कृतज्ञता ज्ञापन एवं कल्याण मंत्र के साथ हुआ। कार्यक्रम में संस्कृत विभाग सहित अन्य विभागों के 30 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे। इनमें ममता वर्मा, कुशल सुधार, शरद कुमार, कुमारी सुष्मिता सहित अन्य विद्यार्थी शामिल थे। अतिथि-व्याख्याता डॉ.चैनसिंह नागवंशी (इतिहास विभाग), डॉ.मुजफ्फर हुसैन (अंग्रेजी विभाग) एवं डॉ.प्रमोद पाण्डे (थिएटर विभाग) सहित विभागीय शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्कृत विभाग के शोधछात्र अतुल त्रिपाठी ने किया।

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