
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। हिन्दी साहित्य के महान पुरोधा एवं साहित्य वाचस्पति डॉ.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की स्मृति को स्थायी सम्मान दिलाने के लिये खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के साहित्यप्रेमियों, बुद्धिजीवियों एवं नागरिकों ने राज्य शासन से महत्वपूर्ण मांगें की हैं। इस संबंध में सेवाभावी संस्था शांतिदूत के संयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चन्द्रवाल को ज्ञापन सौंपकर प्रतिवर्ष 27 मई को डॉ.बख्शी की जयंती राज्य स्तरीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन के रूप में मनाने तथा खैरागढ़ में “डॉ.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति ग्रंथालय” स्थापित किए जाने की मांग की गई है। सेवाभावी संस्था “शांतिदूत” के संयोजन में शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाली जिले की अग्रणी संस्था इकरा फाउंडेशन सहित जिले के सुधि नागरिकों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि खैरागढ़ की पावन धरती हिन्दी साहित्य जगत के ऐसे महान साहित्यकार की जन्मस्थली है जिन्होंने द्विवेदी युग में निबंध, आलोचना, कहानी एवं संपादन के माध्यम से हिन्दी गद्य साहित्य को नई दिशा प्रदान की। बावजूद इसके आज तक उनकी स्मृति में खैरागढ़ में कोई व्यापक शासकीय आयोजन अथवा स्थायी साहित्यिक केंद्र स्थापित नहीं हो सका है। ज्ञापनकर्ताओं ने बताया कि विगत तीन वर्षों से स्थानीय संस्था “शांतिदूत” सहित अन्य सेवाभावी संस्थान सीमित संसाधनों में निबंध प्रतियोगिता एवं छोटे साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित कर डॉ.बख्शी के साहित्यिक योगदान को स्मरण करने का प्रयास कर रही है किंतु उनके विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व के अनुरूप यह प्रयास पर्याप्त नहीं है। नागरिकों ने मांग की है कि डॉ.बख्शी की जयंती पर प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन कराया जाए जिसमें देश-प्रदेश के साहित्यकारों, विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित हो। इसके साथ ही खैरागढ़ में उनके नाम पर एक समृद्ध स्मृति ग्रंथालय स्थापित करने की मांग भी उठाई गई है जिसमें हिन्दी साहित्य की महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं शोध सामग्री का संग्रह उपलब्ध कराया जाए। ज्ञापन में विद्यार्थियों में साहित्यिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से नियमित रूप से निबंध, वाचन, काव्य पाठ, शोध संगोष्ठी एवं साहित्यिक प्रतियोगिताओं के आयोजन का भी प्रस्ताव रखा गया है।
नागरिकों ने डॉ.बख्शी के जीवन एवं साहित्यिक योगदान पर आधारित स्मारक अथवा संग्रहालय स्थापित करने की मांग करते हुए कहा कि यह पहल न केवल एक महान साहित्यकार को सच्ची श्रद्धांजलि होगी बल्कि खैरागढ़ एवं सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पहचान भी दिलाएगी। ज्ञापन में शासन से मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में जिला पंचायत के सीईओ प्रेम कुमार पटेल, शांतिदूत संस्था के संयोजक अनुराग शाँति तुरे, वरिष्ठ समाजसेवी समसूल होदा खान, नागरिक एकता मंच के संयोजक उत्तम कुमार बागडे, इकरा फाउंडेशन के खलील कुरैशी, वरिष्ठ पार्षद एवं सभापति रूपेंद्र रजक, शिक्षक एवं समाजसेवी रुपेश देवांगन, जहीन खान, ईला सिद्दीकी सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।