
सरस्वती गानसभा के 126वें वार्षिकोत्सव में पंडित अवध सिंह की लयकारी ने जीता दिल
पंडित कैवल्य कुमार गुरव की शास्त्रीय गायकी को मिली शानदार संगति
खैरागढ़। खैरागढ़ की समृद्ध संगीत परंपरा का परचम आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा में एक बार फिर लहराया जब प्रख्यात तबला वादक पं.अवध सिंह ने अपनी उंगलियों की जादुई थाप और बेजोड़ लयकारी से संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सरस्वती गानसभा के 126वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह में पं.अवध सिंह की तबला संगति ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित कैवल्य कुमार गुरव की प्रस्तुतियों में चार चांद लगा दिए। गायन और तबले के सुर-ताल के अद्भुत तालमेल ने श्रोताओं की भरपूर वाहवाही बटोरी।
लयकारी और थाप ने बांधा समां
धारवाड़ से पहुंचे सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित कैवल्य कुमार गुरव ने राग यमन से अपनी प्रस्तुति का आरंभ किया। विलंबित रूपक ताल में बंदिश के बाद तीनताल में द्रुत लय की प्रस्तुति ने श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत के विविध रंगों से परिचित कराया। इसके बाद राग मालकौंस में विलंबित और द्रुत लय की बंदिशों तथा राग दीपक की प्रस्तुति ने संगीत की महफिल को नई ऊंचाई दी। अंतिम चरण में राग अड़ाना में भक्ति रचना ‘भवानी दयानी’ की भावपूर्ण प्रस्तुति पर सभागार तालियों से गूंज उठा। इन प्रस्तुतियों के दौरान खैरागढ़ के पं.अवध सिंह ने तबले पर अपनी दक्षता, सहज लयकारी और खनकदार थाप से गायन को प्रभावशाली आधार दिया। उनकी संगति में ताल की बारीकियों और लय के उतार-चढ़ाव का ऐसा संतुलन देखने को मिला जिसने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा वहीं सुप्रसिद्ध हारमोनियम वादक राजेंद्र जी ने भी अपनी सधी हुई संगति से संगीत समारोह में समां बांधा। गायन, तबला और हारमोनियम के सुमधुर समन्वय ने पूरी प्रस्तुति को यादगार बना दिया। काकीनाड़ा के प्रतिष्ठित संगीत मंच पर पं.अवध सिंह की प्रभावशाली उपस्थिति ने खैरागढ़ की संगीत साधना और यहां के कलाकारों की प्रतिभा को गौरवान्वित किया।


