
कार्यशाला का हुआ भव्य समापन
सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। बच्चों के सर्वांगीण विकास, रचनात्मक प्रतिभा के संवर्धन एवं भारतीय लोककला-संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से एमटीए विजुअल एंड परफॉर्मेंस आर्ट छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में आयोजित कला एवं संगीत प्रशिक्षण महाअभियान का भव्य समापन हुआ। यह अभियान 10 मई से 10 जून तक ग्राम पंचायत विक्रमपुर, चोरलाडीह, गातापार एवं कटंगी खुर्द में संचालित किया गया। इस दौरान आयोजित 7 दिवसीय चित्रकला एवं संगीत कार्यशालाओं में बच्चों को भारतीय लोकचित्रकला, लोकसंगीत, सुगम संगीत, हारमोनियम, तबला एवं ऑर्गन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण का संचालन इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से प्रशिक्षित कला एवं संगीत प्रशिक्षक कमलेश सिन्हा द्वारा किया गया। कार्यशाला में बच्चों ने लोकचित्रकला की बारीकियों को सीखने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और लोकसंगीत से जुड़ने का अवसर प्राप्त किया। समापन समारोह में विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, पंचगण एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में बच्चों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई तथा संगीत की आकर्षक मंचीय प्रस्तुतियां दी गईं। इस अवसर पर प्रतिभागी बच्चों को एमटीए ग्रुप की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं तथा उनका उत्साहवर्धन किया गया। कमलेश सिन्हा वर्ष 2013 से लगातार ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान गांव-गांव में कार्यशालाओं का आयोजन कर बच्चों एवं युवाओं को कला और संगीत का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित अनेक विद्यार्थी आज इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ सहित विभिन्न संस्थानों में कला एवं संगीत की उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं जबकि कई छात्र-छात्राएं वर्तमान में भी इस क्षेत्र में अध्ययनरत हैं। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मोबाइल फोन की अत्यधिक निर्भरता से दूर कर उनकी रचनात्मक एवं कलात्मक क्षमताओं को विकसित करना रहा। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे अपनी कला प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़े रह रहे हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंचों तथा एमएटी ग्रुप के कलाकारों कमलेश सिन्हा, सोम कुमार वर्मा, भारत वर्मा, हर्मेंद्र वर्मा, लीलाधर पटेल, निखिल मेरावी एवं रोहित साहू का विशेष योगदान रहा। ज्ञात हो कि ग्रामीण अंचलों में कला और संगीत के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा को नई दिशा देने वाला यह महाअभियान क्षेत्र में रचनात्मक जागरूकता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।
