लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश से प्रशासनिक व्यवस्था पर संकट

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा शिक्षा विभाग के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का संलग्नीकरण (अटैचमेंट) समाप्त कर उन्हें एक सप्ताह के भीतर अपनी मूल पदस्थापना वाले कार्यालय अथवा संस्था में वापस लौटने के निर्देश जारी किए जाने के बाद प्रदेश के अनेक जिला कलेक्टोरेट, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालयों में प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। वर्षों से विभिन्न प्रशासनिक शाखाओं में कार्यरत इन कर्मचारियों की वापसी से कई कार्यालयों में स्टाफ की कमी सामने आने लगी है।
संचालनालय ने 14 जुलाई को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि विभाग के अंतर्गत कार्यरत सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। संबंधित कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर अपनी मूल पदस्थ संस्था अथवा कार्यालय में कार्यभार ग्रहण कर ऑनलाइन ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करानी होगी। निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं करने पर जुलाई माह का वेतन रोकने के साथ ही संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्देशों की अवहेलना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत कदाचार की श्रेणी में मानी जाएगी। कलेक्टोरेट की महत्वपूर्ण शाखाओं पर बढ़ेगा कार्यभार नवगठित जिलों सहित प्रदेश के अनेक जिलों में लंबे समय से कर्मचारियों की कमी के कारण शिक्षा विभाग के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को कलेक्टोरेट की विभिन्न शाखाओं में संलग्न कर प्रशासनिक कार्य लिया जा रहा था। ये कर्मचारी वित्त, परीक्षा, राहत एवं राजस्व, अभियोजन, स्थापना, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), स्थानीय निर्वाचन, भंडार, नजूल सहित कई महत्वपूर्ण शाखाओं का दायित्व संभाल रहे थे। अब संचालनालय के आदेश के बाद इन कर्मचारियों की मूल पदस्थापना में वापसी लगभग तय मानी जा रही है। इससे जिला प्रशासन के सामने समयबद्ध कार्य निष्पादन, शासकीय योजनाओं की मॉनिटरिंग तथा नियमित कार्यालयीन कार्यों के संचालन को लेकर नई चुनौती खड़ी हो सकती है। जानकारी अनुसार कई जिलों में नियमित कर्मचारियों की संख्या पहले से ही सीमित है और अनेक शाखाएं संलग्न कर्मचारियों के सहयोग से ही संचालित हो रही थी।

आदेश का सीधा असर जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों पर भी दिखाई देने लगा है। कार्यभार अधिक होने के कारण इन कार्यालयों में भी वर्षों से गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को संलग्न कर प्रशासनिक दायित्व सौंपे गए थे। कर्मचारियों की वापसी के बाद कई बीईओ कार्यालयों में न्यूनतम स्टाफ ही शेष रह जाएगा। ऐसी स्थिति में साइकिल वितरण, पाठ्यपुस्तक वितरण, मध्याह्न भोजन योजना, छात्रवृत्ति, वेतन एवं पेंशन प्रकरण, गणवेश योजना, सांख्यिकी संकलन तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं के संचालन जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है वहीं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में भी शेष कर्मचारियों पर पूरे जिले की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं का अतिरिक्त भार बढ़ जाएगा।

लोक शिक्षण संचालनालय ने 15 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारियों को एक अन्य पत्र जारी कर यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में मूल पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध उनके वास्तविक ज्वाइन करने की तिथि तक ‘ब्रेक इन सर्विस’ का प्रस्ताव भेजा जाए। इस निर्देश के बाद कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी जिसके चलते अधिकांश कर्मचारियों ने मूल संस्था में लौटने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी।

जानकारी अनुसार जिले के विभिन्न कार्यालयों से संलग्न कर्मचारियों को मूल पदस्थापना के लिए रिलीव करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। कलेक्टोरेट की विभिन्न शाखाओं से 32 कर्मचारियों सहित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जिला पंचायत तथा विधायक कार्यालय से कुल 47 कर्मचारियों को उनकी मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण करने के लिए रिलीव कर दिया गया है।

कर्मचारियों की वापसी से एक ओर शासन मूल पदस्थापना संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहता है वहीं दूसरी ओर वर्षों से संलग्न कर्मचारियों के भरोसे संचालित जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के कार्यालयों के सामने कार्य संचालन की नई चुनौती खड़ी हो गई है। यदि रिक्त पदों पर शीघ्र नियमित नियुक्ति अथवा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो विभिन्न प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों की गति प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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