लाखों की खरीदी पर फिर सवाल: सभापतियों को नहीं दी गई जानकारी

सत्यमेव न्यूज खैरागढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। खैरागढ़ और छुईखदान परियोजना अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए स्वच्छता सामग्री एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की लाखों रुपये की खरीदी और वितरण को लेकर विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। ज्ञात हो कि कि इतनी बड़ी खरीदी प्रक्रिया की जानकारी विभाग से जुड़े जनपद स्तर के सभापतियों तक को नहीं दी गई। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी विभाग से नहीं बल्कि मीडिया और अन्य माध्यमों से मिली।जानकारी अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए निरमा, साबुन, झाड़ू, टॉयलेट क्लीनर, फर्श क्लीनर, नेलकटर, तेल, प्लास्टिक कुर्सी, गतिविधि पुस्तक, पालक कार्ड, पालक कैलेंडर, प्रेशर कुकर, ग्रीन राइटिंग बोर्ड, गिलास, स्टील कंटेनर, मेस ट्रे, थाली तथा अनाज कोठी सहित कई सामग्रियों की खरीदी की गई है। हालांकि विभाग की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि खरीदी की कुल राशि कितनी है, सामग्री किस फर्म या एजेंसी से खरीदी गई और चयन की प्रक्रिया क्या रही।

मामले की जानकारी उस समय सामने आई जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परियोजना कार्यालय से सामग्री लेने पहुंचे। इसके बाद जनप्रतिनिधियों और विभागीय सदस्यों ने अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों ने बताया कि सामग्री की खरीदी जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई है तथा वितरण प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके बावजूद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि लाखों रुपये की खरीदी के बावजूद संबंधित जनप्रतिनिधियों और विभागीय सभापतियों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया वहीं मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की परेशानियों को लेकर सामने आया है जिसमें परियोजना कार्यालय से विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों तक सामग्री पहुंचाने के लिए विभाग द्वारा किसी प्रकार की परिवहन व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके चलते कार्यकर्ताओं को स्वयं राशि एकत्र कर वाहन की व्यवस्था करनी पड़ी। एक कार्यकर्ता ने बताया कि उनके सेक्टर में लगभग 25 आंगनबाड़ी केंद्र हैं जहां सभी ने मिलकर 100-100 रुपये का योगदान दिया और वाहन किराए पर लेकर सामग्री केंद्रों तक पहुंचाई। इससे विभागीय व्यवस्था और समन्वय पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।


छुईखदान महिला एवं बाल विकास विभाग की जनपद सभापति ज्योति जंघेल ने कहा कि उन्हें खरीदी प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जानकारी मिलने पर उन्होंने परियोजना अधिकारी से चर्चा की जहां बताया गया कि खरीदी उच्च स्तर से की गई है और सामग्री का वितरण जारी है वहीं जनपद पंचायत खैरागढ़ की महिला एवं बाल विकास सभापति दीक्षा पुर्नचंद गुप्ता ने भी कहा कि उन्हें खरीदी की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा आज तक किसी भी खरीदी प्रक्रिया की जानकारी साझा नहीं की गई और केवल भर्ती संबंधी अनुमोदनों की जानकारी दी जाती रही है। पाठकों को बता दे कि अब यह मामला केवल सामग्री खरीदी तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि विभागीय जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जनप्रतिनिधियों ने संकेत दिए हैं कि मामले को जनपद से जिला पंचायत स्तर तक उठाया जाएगा तथा आवश्यक पत्राचार कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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