मुकेश के अमर गीतों से सजी शहीद नगरी छुईखदान में संगीत संध्या

सत्यमेव न्यूज छुईखदान। महान पार्श्वगायक मुकेश चन्द्र माथुर की पुण्यतिथि पर छुईखदान में सुरों और स्मृतियों से सजी भावपूर्ण संगीत संध्या का आयोजन किया गया। न्यू म्यूजिकल ग्रुप कराओके आर्केस्ट्रा, छुईखदान के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने मुकेश के सदाबहार गीतों की प्रस्तुति देकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की शुरुआत मुकेश के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं गुलाल अर्पित कर की गई। संगीत संध्या में स्थानीय युवा एवं वरिष्ठ कलाकारों ने मुकेश के लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज में प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। डीके नामदेव और दीपाली सोनी ने ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ तथा ‘मैं ना भूलूंगा’ जैसे गीत प्रस्तुत किए। कमलेश यादव ने ‘कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है जबकि अशोक चन्द्राकर ने ‘तौबा ये मतवाली चाल’ और ‘तुम बिन जीवन कैसे बीता’ की प्रस्तुति दी। महेश वैष्णव ने ‘डम डम डिगा डिगा’ तथा ‘सुहाना सफर और ये मौसम हंसी’ जैसे लोकप्रिय गीतों से समां बांधा वहीं उदय चंदेल, मानिक श्रीवास, श्याम सुंदर महोबिया और राजकुमार वैष्णव ने ‘चंचल निर्मल शीतल कोमल’, ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’, ‘एक प्यार का नगमा है’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’ और ‘ओ मेरे सनम’ सहित कई सदाबहार गीतों की प्रस्तुति दी। कलाकारों की सुरमयी प्रस्तुतियों पर श्रोतागण देर तक झूमते रहे।
कार्यक्रम में अंशुल सोनी, वीरेंद्र जैन, दिलीप वैष्णव, प्रदीप श्रीवास्तव, दीपक वैष्णव, डॉ.भद्र, लल्ला जितेन्द्र किशोर वैष्णव, दिनेश महोबिया, निशा नामदेव, रानी सोनी, बिट्टी बन्नो नामदेव, पिंटू महोबिया, मधुमंगल सिंह, नवीन, प्रेम किशन राधे, निखिल सोनी सहित बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी एवं श्रोता उपस्थित रहे। इस अवसर पर वैष्णव समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल जेके वैष्णव ने मुकेश चन्द्र माथुर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मुकेश ने अपनी विशिष्ट गायकी से भारतीय संगीत जगत में अमिट पहचान बनाई। उनकी संगीत विरासत को उनके पुत्र नितिन मुकेश और प्रपौत्र नील नितिन मुकेश ने भी आगे बढ़ाया और संगीत एवं कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की। उन्होंने न्यू म्यूजिकल ग्रुप कराओके आर्केस्ट्रा, छुईखदान के डीके नामदेव, कमलेश यादव, दीपाली सोनी, महेश वैष्णव, अशोक चन्द्राकर और उदय चंदेल सहित सभी कलाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गीत-संगीत के बिना जीवन अधूरा है। मुकेश के स्वर में गाए गीत और भजन आज भी मन को छूते हैं तथा श्रोताओं में प्रसन्नता, उमंग और आत्मीयता का भाव जगाते हैं।

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