छुईखदान में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से राजस्व कार्य ठप, किसान परेशान

छुईखदान। क्षेत्र में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित हो रहा है। इससे किसानों के साथ आम नागरिकों और छात्र-छात्राओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जरूरी दस्तावेजों और पटवारी प्रतिवेदन के अभाव में लोग तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हड़ताल का असर खेती-किसानी से जुड़े कार्यों पर भी पड़ रहा है। जमीनों के नामांतरण, फौती, बंटवारा, सीमांकन और रिकॉर्ड दुरुस्ती जैसे मामले लंबित हैं। वहीं, धान खरीदी के लिए भूमि सत्यापन एवं पंजीयन और कृषि ऋण लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने में भी किसानों को दिक्कतें हो रही हैं। समय पर काम नहीं होने से आगामी कृषि गतिविधियों की तैयारी प्रभावित होने की आशंका है।

पटवारियों की अनुपस्थिति से जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। स्कूल-कॉलेजों में प्रवेश और छात्रवृत्ति के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेज, नक्शा-खसरा और अन्य राजस्व अभिलेख प्राप्त करने में भी लोगों को परेशानी हो रही है।

दूर-दराज के गांवों से किराया खर्च कर तहसील कार्यालय पहुंचने वाले किसानों और ग्रामीणों को काम नहीं होने पर वापस लौटना पड़ रहा है। प्रभावित लोगों का कहना है कि पटवारियों की मांगों पर शासन-प्रशासन को विचार करना चाहिए लेकिन हड़ताल के कारण आम जनता के जरूरी काम अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रहने चाहिए। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि हड़ताल समाप्त होने तक राजस्व निरीक्षकों (आरआई) या अन्य सक्षम अधिकारियों के माध्यम से वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि नामांतरण, भूमि सत्यापन और प्रमाण पत्रों से जुड़े जरूरी काम जारी रह सकें। उनका कहना है कि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है।

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